अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य ललित कला

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

बच्चो बल के तीन नियम

बच्चो बल के तीन नियम,
जिनसे चलती दुनिया हरदम।
प्रथम नियम की सुनो कहानी,
न्यूटन काका की ही जबानी॥
 
स्थिर है कोई वस्तु अगर,
स्थिर ही वह रहती है,
वस्तु कोई गतिमान अगर,
गतिमान सदा वह रहती है॥
बस बाह्य बल अनुपस्थित हो,
उसका न कहीं कोई,अस्तित्व हो।
बस इसी शर्त की गाँठ बाँध लो,
यह प्रथम नियम है, इसे साध लो॥
 
अब द्वितीय नियम की सुनो कहानी,
मनभावन यह बड़ी सुहानी॥
किसी वस्तु का त्वरण हमेशा,
होता बल के अनुक्रमानुपाती,
कभी भूलना मत तुम इसको,
सदा याद रखो यह पाती॥
 
अब तृतीय नियम की बारी आई,
रॉकेट जिससे चलता भाई॥
जितना बल हम वस्तु पर लगाते,
उतना वह हम पर भी लगाती,
परिमाण समान रहता दोनों का,
केवल दिशा बदल है जाती॥
 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

आओ, पर्यावरण बचाएँ
|

सूरज ने जब आँख दिखाई। लगी झुलसने धरती माई॥…

आज के हम बच्चे
|

हम नन्हे-मुन्हे तारे, आओ टिमटिमाएँ सारे।…

एक यार दे दो ना भगवान
|

सुख में साथ नाचने को तो हज़ारों लोग हैं मेरे…

ऐसा जीवन आया था
|

घूमते हो जो तुम इन  रंग बिरंगे बाज़ारों…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

बाल साहित्य कविता

किशोर साहित्य कविता

कविता

कविता - हाइकु

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं