हंसदेह
काव्य साहित्य | कविता अनिमा दास15 May 2023 (अंक: 229, द्वितीय, 2023 में प्रकाशित)
(सॉनेट)
इस परिधि से पृथक प्राक् पृथ्वी है नहीं
इस मयमंत समय का क्या अंत है कहीं?
नहीं . . . नहीं अब नवजीवन नहीं स्वीकार
अति असह्य . . . अरण्यवास का अभिहार।
भविष्य की भीति भस्म में बद्ध वर्तमान
प्रत्यय एवं प्रणय में पराभूत . . . प्रतिमान
क्षणिक में क्यों नहीं क्षय होती क्षणदा?
जैसे प्रेम में प्रतिहत प्रत्यूष की प्रमदा!
नहीं स्वीकार नव्य नैराश्य से निविड़ता
अद्य अति असह्य है अतिशय अधीनता
उन्मुक्त-अध्वर-उन्मुक्त-अदिति उन्मुक्त
हो, शीघ्र यह शरीर सरित हो पुनः शुक्त।
हे, शब्द संवाहक! कहाँ है वह चित्रावली
हंसदेह को अविस्मृत करती पत्रावली?
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