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रोबोट की हत्या

 

सुबह की चाय पीते हुए आर्यन अख़बार पढ़ रहा था। अचानक उसकी नज़र एक अजीब-सी ख़बर पर पड़ी, “अत्यधिक काम के बोझ से परेशान रोबोट ने आत्महत्या की!” 

वह चौंक गया। भला एक मशीन भी आत्महत्या कर सकती है? वह अपनी जिज्ञासा को शांत करने हेतु माँ के पास गया। 

माँ ने बताया, “विज्ञान की प्रगति के साथ मनुष्य ने ऐसे रोबोट बना लिए थे, जो घर, दफ़्तर, अस्पताल, कारख़ाने हर जगह काम करते थे। धीरे-धीरे लोगों ने अपने लगभग सभी काम रोबोटों पर छोड़ दिए। वे स्वयं आरामतलब और आलसी होते गए। सुबह की चाय से लेकर रात के भोजन तक, हर काम रोबोट ही करते थे। दूसरी ओर, मनुष्य तनाव, मोटापा और अनेक बीमारियों का शिकार बनने लगा। जिस रोबोट की ख़बर छपी थी, वह चौबीसों घंटे बिना रुके काम करता था। उसके मालिक ने उसे कभी विश्राम नहीं दिया। दिन-रात आदेश पर आदेश मिलते रहे। अंततः उसकी प्रणाली जवाब दे गई। एक दिन उसने स्वयं को स्थायी रूप से बंद कर लिया। समाचार पत्रों ने इसे ‘रोबोट की आत्महत्या’ कहा, परन्तु सच्चाई कुछ और थी।” 

आर्यन को लगा कि रोबोट ने आत्महत्या नहीं की बल्कि यह ‘रोबोट की हत्या’ थी। हत्या उस स्वार्थी सोच ने की थी, जो हर ज़िम्मेदारी दूसरों पर डालकर स्वयं सुख भोगना चाहती है। उस दिन उसे समझ आया कि चाहे मनुष्य हो या मशीन, किसी पर भी आवश्यकता से अधिक बोझ डालना विनाश को ही जन्म देता है। आख़िरकार, मनुष्य का स्वार्थ ही उसे ले डूबता है। 

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