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हमने उनके वास्ते सब कुछ गँवाया

हमने उनके वास्ते 
सब कुछ गँवाया 
क्या इसी दिन के लिए

वे हमें अब 
मारते-दुत्कारते हैं 
हम सदा जीते रहे 
जिनके लिए

तंगहाली में लिया था 
कर्ज़ जिसका 
ब्याज भी वे आज 
गिन-गिन के लिए

ज्ञान ऊधौ 
पास ही रखिए 
न कोई प्रेम का है मोल 
गोपिन के लिए

अन्न के दाने उठाते 
हाथ बूढ़े सोच लो
अपने लिए या 
नात-नातिन के लिए 

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