मधुरता और मिठास के साथ मुद्दों पर लिखा गया गीत
समीक्षा | पुस्तक समीक्षा डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी1 Feb 2026 (अंक: 293, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
समीक्षित पुस्तक: जहाँ नहीं उजियार
गीतकार: योगेंद्र प्रताप मौर्य
प्रकाशक: कलाकार पब्लिशर्स नई दिल्ली
वर्ष: 2025
मूल्य: ₹350
पृष्ठ: 127
जहाँ नहीं उजियार योगेंद्र प्रताप मौर्य लिखित नवगीत का नया संग्रह है। इससे पहले नवगीत की एक तथा बाल कविताओं की दो-तीन किताबें उनकी प्रकाशित हो चुकी हैं। नवगीत गीत के बाद की ऐसी विधा है जिसने अपनी अभिव्यक्ति के लिए नये शिल्प, नई भाषा, मुहावरे और भावबोध तलाशे हैं। नवगीत छंद विधान का पालन करते हुए भी अपनी अभिव्यक्ति को सरल और सहज तरीक़े से पेश करता है। उसमें वह मधुरता और मिठास पाई जाती है, जो हमारे दिल में उतरने का माद्दा रखती है। योगेंद्र प्रताप मौर्य ने अपने इन साठ गीतों में उस नाज़ुकी का पूरा ख़्याल रखा है। उनका पहला गीत ही युद्ध की विभीषिका पर है, जिसमें वह सब बच्चे हताहत हो रहे हैं, जिन्हें युद्ध के बारे में पता भी नहीं है:
युद्ध कितने रोज़ होंगे
कौन साज़िश कर रहा है
गड़गड़ाती है मिसाइल
और बच्चा डर रहा है
उनके गीत को पढ़ते हुए आशा और निराशा दोनों के भाव जगते हैं। जहाँ उम्मीदों के गीत, हम कर्मठ इंसान, सूरज उगता है जैसी रचनाएँ हमें कर्मठता की तरफ़ आमादा करती हैं, वहीं दहशत है सन्नाटा है, रोज़ बाँटती है सुख आदि में गीतकार समय की बेबसी देखकर निराशा की तरफ़ चला जाता है। देखने की बात ये है कि ऐसे आलम में भी कवि बढ़ते रहने का संदेश देता है:
आगे-आगे राह दिखाता
सूरज चलता है
जब भी मिलता है श्रम का फल
मीठा मिलता है
गीतकार एक बिंब रचता है, तथा अधिकतर तटके प्रतीकों और उदाहरणों के माध्यम से अपनी बात स्पष्ट करता है:
बात-बात पर सूरज तारे
गाल बजाएँ
सोच समझ कर सपनों की
करते हत्याएँ
आगे गीतकार एक ऐसा संदेश देता है, जिसकी ज़रूरत और ख़्याल हर एक हिंदुस्तानी के लिए लाज़िम है:
है हड़ताल ज़रूरी
बातें भी लवाना
ठीक नहीं है किन्तु सड़क पर
देश जालना
इस संग्रह के गीतों की सबसे बड़ी विशेषता मनुष्य को मनुष्यता की तरफ़ वापस लाना है। गीतकार बार-बार मासूम सा प्रश्न करता है, जिसका मर्म हमारे हृदय में चुभता हुआ निकल जाता है:
अपने भीतर इतनी आग
कहाँ से लाते हो
आख़िर क्यों गंगा जमुनी
तहज़ीब मिटाते हो
इस प्रकार हम देखते हैं कि बनावट और बुनावट दोनों दृष्टि से यह संग्रह महत्त्वपूर्ण है। ज़िन्दगी की जिस गहरी सच्चाई को यहाँ उतारा गया है, यह गीतकार के संवेदनशील मन और सघन अनुभूति का परिचायक है।
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