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ग़ज़ल में उड़ान की ख़्वाहिश

पुस्तक: ख़्वाहिश (ग़ज़ल संग्रह) 
मूल्य: ₹199/-
पृष्ठ: 104
वर्ष: 2023
प्रकाशक: श्वेतवर्णा प्रकाशन, सेक्टर 93, नोएडा (उ.प्र.)


रामनाथ बेख़बर का ताल्लुक़ उसी इलाक़े से है, जो जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि रही है, लेकिन बेख़बर की ग़ज़लें किसी बेजा आंदोलन की हिमायत नहीं करतीं, बल्कि सादगी और शालीनता से अपनी बात कहती हुई आगे बढ़ जाती हैं। 

‘ख़्वाहिश’ रामनाथ बेख़बर की ग़ज़ल की नई किताब है, जिसमें लगभग नब्बे ग़ज़लें हैं, जो आपको आश्वासन की दुनिया से यथार्थ की दुनिया की तरफ़ ले जाती हैं। इसी संकलन का एक शेर है:

“नून, लकड़ी, तेल की अदना ज़रूरत के लिए
हाशिए का आदमी बाज़ार से लड़ता रहा”

ये एक शेर न मात्र आम लोगों की पीड़ा को व्यक्त करता है, बल्कि छोटी-मोटी ज़रूरतों के लिए निम्न वर्ग की बेकसी को उजागर भी करता है। 

उनकी ग़ज़लों में किसान, मज़दूर, प्रेम, चिड़िया, आकाश, नदी सब कुछ है। जब वह चिड़िया की बात करते हैं तो कहते हैं:

 “पहली पहली उड़ान चिड़िया की
 देख कर मन ही मन पवन ख़ुश है”

ज़ाहिर है हिंदी ग़ज़ल वंचित वर्गों की फ़िक्र करती है, इस फ़िक्र में उसके तेवर कभी दुष्यंत की तरह विद्रोही हो जाते हैं, तो कभी वो शायरी शमशेर की तरह नर्म सुखन बन कर फूटती है। 

हिंदी ग़ज़ल को रामनाथ बेख़बर की किताब ‘ख़्वाहिश’ से काफ़ी उम्मीदें हैं। इन दिनों जो लोग हिंदी ग़ज़ल में बड़ी तेज़ी से अपनी शनाख़्त बना रहे हैं, उनमें रामनाथ बेख़बर का भी एक जाना-पहचाना नाम है। श्वेतवर्णा प्रकाशन ने हमेशा की तरह इस किताब को और भी आकर्षक बना दिया है। 

— डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री
सहायक प्रोफ़ेसर
हिन्दी विभाग
मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज गया, बिहार
9934847941

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