अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

ऊँचाई और गहराई

काईयुक्त चट्टानों से घिरी घाटी में दो मित्र फँसे हुए थे। दोनों मित्र ऊपर जाने  की कोशिश करते और फिसल जाते; दोनों को चोट भी लगती। एक प्रयास करता रहा और दूसने शारीरिक तो क्या मानसिक प्रयास भी नहीं किया। आख़िर में प्रयासरत व्यक्ति बाहर निकल गया। ऊपर आया व्यक्ति गहराई की ओर देख रहा था और गहराई में फँसा व्यक्ति ऊँचाई की ओर।

दोनों की नज़रें एक दूसरे से मौन वार्तालाप कर रहीं थीं, पहले की नज़र कह रही थी, "ज़रा ठहरो, मैं भी प्रयास करता हूँ।" और दूसरे की नज़र कह रही थी, "अगर तुमने मेरी सहायता की होती तो दोनों बहुत पहले ही बाहर आ जाते।"

एक व्यक्ति के मन में पश्चाताप की भावना उत्पन्न हुई और दूसरे में आत्मविश्वास की। आत्मविश्वासी व्यक्ति अपने मंज़िल की ओर चल पड़ा और पश्चाताप करने वाला व्यक्ति, बड़ी मशक़्क़त के बाद बाहर आ पाया और वहीं जीवनयापन करने लगा।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अँधेरा
|

डॉक्टर की पर्ची दुकानदार को थमा कर भी चच्ची…

अंजुम जी
|

अवसाद कब किसे, क्यों, किस वज़ह से अपना शिकार…

अंडा
|

मिश्रा जी अभी तक'ब्राह्मणत्व' का…

अंधविश्वास
|

प्रत्येक दिन किसी न किसी व्यक्ति की मौत…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

लघुकथा

सांस्कृतिक कथा

कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं