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भाग्य की राहों पर

प्यार तो तुमको ही किया है . . .
तुम मेरे भाग्य में हो 
माँग में तुम्हारा हूँ मैं 
सिंदूर द्वारा सज्जित 
भाग्य में तुम्हारा हूँ मैं 
आत्मा द्वारा अर्पित 
तुम मेरे आत्मा में हो . . .
 
या नहीं हो . . .!
वह तो बाद की बात है
 
मेरे अंतर्मन में 
पहले से ही 
बस चुके हो 
रच चुके हो 
सँवर चुके हो . . .
तुम्हें अपना बनाने के लिए 
नींदों के सपने बनाने के लिए
 
तुम मेरे ही होकर रहोगे . . . 
ऐसा भी नहीं है . . .!
 
ऐसी निहित स्वार्थ 
अपना ही इच्छार्थ
लेकर तुम्हें चाहा है 
ऐसा भी नहीं है . . .!!
 
दिल का मामला था 
फ़ासला फ़ासला था 
बस हृदय में एक 
मज़बूत हौसला था . . .
 
जिन्होंने . . . 
मुझे अवगत 
कराए बग़ैर ही 
तुम्हें पसंद कर लिया . . .
 
चाहा . . .! 
सराहा . . .!! 
बुनता रहा . . .!!! 
उधेड़ता रहा . . .!!!!
 
तब कहीं जाकर . . . 
प्यार तो तुमको ही किया है . . .
 
चाहत में कोई कमी ना होगी 
इश्क़ में कोई नमी होगी 
बस . . .! 
यह ज़िंदगी 
भाग्य के राहों पर 
हमेशा प्रतीक्षित रहेगी . . .।

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