रिश्तों में मिठास ज़रूरी है
शायरी | नज़्म अजयवीर सिंह वर्मा ’क़फ़स’1 Apr 2025 (अंक: 274, प्रथम, 2025 में प्रकाशित)
खट्टे तीखे फीके का अभास ज़रूरी है
और हाँ रिश्तों में मिठास ज़रूरी है
चाहे टिक्की चाहे गोलगप्पे या चाट
हर ज़ाइक़ा के साथ खटास ज़रूरी है
नमकीन बर्फ़ पानी सोडा सब ठीक है
मय के साथ सिर्फ़ गिलास ज़रूरी है
महल्ले से, शहर से, राज्य से, देश से
वोट ले लिया अब विकास ज़रूरी है
सुना है वो दोहा शेर और हिरण का
जीतने के लिए श्रम प्रयास ज़रूरी है
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