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तेरी उस और की दुनियाँ से दूर हूँ

 

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तेरी उस और की दुनियाँ से दूर हूँ
कह नहीं सकता कितना मैं मजबूर हूँ।
 
मैं तो तेरे तस्सवुर में ही खोया हूँ
लोग कहते हैं बड़ा ही मैं मग़रूर हूँ।
 
एक तो मंज़िलों का ठिकाना नहीं
दूसरा ठोकरों से हुआ चूर हूँ।
 
मुझको तो बदल जाने की आदत नहीं
सदियों से जो चला आया दस्तूर हूँ।
 
मेरी हालत पे सबको रहम आता है
ख़बर है जो भी हूँ तुम्हें मंज़ूर हूँ।

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