तसल्ली
कथा साहित्य | सांस्कृतिक कथा सुनील कुमार शर्मा1 Feb 2026 (अंक: 293, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
झील के किनारे खड़े कुत्ते के आगे किसी ने एक रोटी का टुकड़ा फेंक दिया। जब वह उसे उठाकर खाने लगा; तो उसकी निगाह, झील के शांत खड़े पानी में अपने हमशक्ल दूसरे कुत्ते पर पड़ी; जिसने उसी की तरह रोटी का टुकड़ा उठा रखा था। जिसे देखते ही, वह आपे से बाहर हो गया। और उसकी तरफ़ मुँह करके, ग़ुस्से के साथ ज़ोर से भौंका। जिससे उसके मुँह में पकड़ा हुआ रोटी का टुकड़ा झील के गहरे पानी में जा गिरा। एकबार तो वह भौचक्का-सा रह गया, और उदास हो गया। पर जब उसने देखा कि दूसरे कुत्ते के मुँह से भी रोटी का टुकड़ा निकल गया है; तो वह एकदम से तनाव मुक्त हो गया। और दिल को तसल्ली देते हुए फुसफुसाया, “कोई बात नहीं, अपनी गई सो गई . . . उसके मुँह में भी तो नहीं रहने दी।
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