चाचा नेहरू
बाल साहित्य | बाल साहित्य कविता जयचन्द प्रजापति ‘जय’15 Nov 2025 (अंक: 288, द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)
चाचा नेहरू सबको अच्छे लगते हैं,
बच्चे उनको चाचा नेहरू कहते हैं।
चाचा को बच्चे ख़ूब अच्छे लगते हैं,
चाचाजी बच्चों को फूल समझते हैं।
बच्चों को देश की फुलवारी कहते हैं,
बच्चे चाचाजी को दिल में रखते हैं।
चाचा बच्चों संग बच्चे बन जाते हैं,
बच्चे भगवान का रूप कहे जाते हैं।
जहाँ बच्चों को प्यार नहीं मिलता है,
वह घर-आँगन सूना-सूना रहता है।
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
कविता
- आदिवासी बच्चियाँ
- उनका हिस्सा
- उषा का आगमन
- एक थे अटल
- एक नाबालिग़ लड़की
- कोहरा
- कोहरे में
- देश के नेताओ
- निष्ठुर समय
- पर्वत, जो मूक खड़े हैं
- पीढ़ियाँ
- पूस की रात
- बसंत
- मत सताना
- मेरी कवितायें
- मेरी दृष्टि
- मैंने भागकर शादी कर ली
- वह मज़दूर
- सर्दी में एक स्त्री
- सुकून चाहता हूँ
- हम वेश्या हैं
- हँसने दो
- हारे लोग
- हे नवांकुरो
बाल साहित्य कविता
चिन्तन
बाल साहित्य कहानी
किशोर साहित्य कहानी
हास्य-व्यंग्य कविता
कहानी
लघुकथा
ललित निबन्ध
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं