जाड़ा आया
बाल साहित्य | बाल साहित्य कविता जयचन्द प्रजापति ‘जय’15 Nov 2025 (अंक: 288, द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)
देखो बच्चो, जाड़ा आया।
सबसे प्यारा मौसम आया॥
स्वेटर, टोपी साथ में लाया।
हल्की-हल्की छींक भी लाया॥
रजाई और तकिया भी लाया।
शादी की शहनाई भी लाया॥
हरी-हरी तरकारी भी लाया।
जाड़ा गली-मोहल्ले से आया॥
हरे मटर की फलियाँ लाया।
सरसों की पीली चादर लाया॥
घर में नया-नया मेहमान आया।
देखो प्यारे ये ठंडी हवा लाया॥
धरती पर कोमल मुस्कान लाया।
देखो बच्चो, मस्ती में जाड़ा आया॥
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