देश के नेताओ
काव्य साहित्य | कविता जयचन्द प्रजापति ‘जय’15 Jan 2026 (अंक: 292, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
कुछ ऐसी चाल चलो
खिल जाये चमन
बहे मस्त पुरवाई
होंठों पर ख़ुशी छलके
लाना ऐसी योजना
महक-चहक पड़े
सूनी गलियाँ भी
चौराहे पर खड़ा आदमी
जय-जयकार करे
ऐसे नेताओं की
जिसमें नहीं है मानव कल्याण
क्या करेगा देशसेवा
झूठे वादों पर
नहीं टिकती राजनीति
ऐसी राजनीति
अलाव की तरह है
जहाँ सिर्फ़ राख बचती है
सुनो, देश के नेताओ
मेरी बात सुनो!
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
किशोर साहित्य कहानी
कविता
बाल साहित्य कहानी
बाल साहित्य कविता
हास्य-व्यंग्य कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
कहानी
लघुकथा
ललित निबन्ध
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं