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सरस्वती वरदान दे

सरस्वती बखान कर
राष्ट्र को महान कर, 
जो बह रहा प्रवाह से
उसे अमिट गीत कर। 
 
दूर भी दृश्यमान हो
उड़ान ये सशक्त हो, 
सत्य शाश्वत अगाध हो
विराटता में साँस हो। 
 
मन के द्वार पर
ये गगन विस्तार कर, 
प्रिय को प्रिय कर
आवास में निवास कर। 
 
अरूप को स्वरूप दे
प्रगाढ़ तू सम्बन्ध दे, 
सरस्वती वरदान दे
उदार को विस्तार दे। 
 
मन को अराध्य दे
प्यार को प्रयास दे, 
गति को ज्ञान दे
रोग को निदान दे। 
 
स्वर को पूर्ण कर
अधर पर लय धर, 
प्राण को अभेद्य कर
शक्ति को सम्पूर्ण कर। 

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