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हलधर नाग का काव्य संसार

पुजारी लुरु के भगवान कालिया

 

 

लदर-भदर लुरु पुजारी, 
नाचता पीट-पीट छाती 
कठ-पुतला कालिया महाप्रभु, 
भावरस से उतारता आरती। 
 
भाव जहाँ, लाभ वहाँ 
भाव ही खाँड मधुर 
लंका भी भाव से पास 
नहीं तो, है अति दूर। 
 
तोशगाँव के ज़मींदार ने दिया 
लुरु को कठ-पुतला 
सिर पर चाँदी का मुकुट 
बारह या पंद्रह तौला। 
 
देखने में होगा एक युवा 
जैसे इन्द्रद्युम्न राजा 
पहचान लुरु की महानता 
दिया एक महत खंजा। 
 
“लुरु, लुरु”, सभी पुकारते 
शंकर जातक नाम 
गंडा जाति में जन्मा वह 
वीर भूमि, घेंस गाँव। 
 
क्या पता दसिया बाउरी ने 
लिया जन्म बन लुरु 
जिसकी पुकार सुन पुरी मंदिर से
बाहर आए जगन्नाथ महाप्रभु। 
 
पीतल-थाली में रखकर 
गाँव-गाँव में माँगता-फिरता 
कालिया को खिलाकर, फिर खाता 
जो जहाँ उसे मिलता। 
 
सोते समय पेट के नीचे रख 
सुला देता कालिया 
लुरु का कालिया, कालिया का लुरु, 
एक-दूसरे को दिल लिया-दिया। 
 
फूलझर से लौट रहा था लुरु 
शाम जा रही थी ढल 
पेड़ के नीचे गुज़ारी रात 
सड़क के किनारे किसी स्थल। 
 
मुर्ग़े की बाँग से खुल गई नींद, 
करने जाना था प्रात:स्नान 
उठा देखा नहीं कालिया 
हताश हो गया लुरु महान। 
 
“कालिया, कालिया” पुकारा लुरू 
पीट-पीट छाती 
“मैंने कभी नहीं छोड़ा तुझे, 
फिर क्यों छोड़ गया प्रभाती?” 
 
बिन खाए-पिए सो गया वह 
पेड़ के नीचे करवट बदल 
सपने में कालिया ने कहा, 
“अरे लुरु, फँसा मैं गोबर-तल।” 
 
उठकर गया पूर्व दिग, 
भागा तरबतर 
जैसे रँभाती गाय खोकर वत्स, 
भागती लसर-पसर। 
 
बदबूदार कचरा, भिनभिनाती मक्खियाँ 
नाक में खलबल 
गोबर की गहरी खाई में, 
पड़ा कालिया सिर के बल। 
 
लुरु ने कहा, क्यों आए इस खाद के ढेर, 
रूठकर मुझसे, गेल्हा 
कहाँ फेंक दिया चाँदी का मुकुट? 
सिर लग रहा मैला। 
 
“चलो, अब अभी भी ओस गिर रही है, 
जाना है बहुत दूर बाट 
कितने खाओगे फल-केले? 
आज लगेगा सोहेला में हाट। 
 
”तुम ले रहे हो मेरी परीक्षा 
क्या करेगा लुरू? 
चाँदी-मुकुट छीनकर 
तुम्हें फेंक गया लुटेरा? 
 
”ले जाने दो उसे मुकुट
दिल में न आने दो कुभाव 
जब तक लुरु ज़िन्दा है, 
नहीं होगा कोई अभाव? 
 
“बाहें फैलाकर बुला रहा हूँ कालिया 
आ जा मेरी कोल।” 
दौड़कर आए कालिया महाप्रभु 
बैठे लुरु की गोद। 

पुस्तक की विषय सूची

  1. समर्पित
  2. भूमिका
  3. अभिमत
  4. अनुवादक की क़लम से . . . 
  5. प्रथम सर्ग
  6. श्री समेलई
  7. पहला सर्ग
  8. दूसरा सर्ग
  9. तीसरा सर्ग
  10. चौथा सर्ग
  11. हमारे गाँव का श्मशान-घाट
  12. लाभ
  13. एक मुट्ठी चावल के लिए
  14. कुंजल पारा 
  15. चैत (मार्च) की सुबह
  16. नर्तकी 
  17. भ्रम का बाज़ार
  18. कामधेनु
  19. ज़रा सोचो
  20. दुखी हमेशा अहंकार
  21. रंग लगे बूढ़े का अंतिम संस्कार
  22. पशु और मनुष्य
  23. चेतावनी 
  24. स्वच्छ भारत
  25. तितली
  26. कहानी ख़त्म 
  27. छोटे भाई का साहस
  28. संचार धुन में गीत
  29. मिट्टी का आदर
  30. अछूत – (1-100)
  31. अछूत–(101-208) 
  32. लालटेन
  33. अग्नि
  34. गर्मी 
  35. बारिश 
  36. पुजारी लुरु के भगवान कालिया
  37. नींद 
  38. छंदा चरण अवतार

लेखक की पुस्तकें

  1. हलधर नाग के लोक-साहित्य पर विमर्श
  2. हलधर नाग का काव्य संसार
  3. शहीद बिका नाएक की खोज दिनेश माली
  4. सौन्दर्य जल में नर्मदा
  5. सौन्दर्य जल में नर्मदा
  6. भिक्षुणी
  7. गाँधी: महात्मा एवं सत्यधर्मी
  8. त्रेता: एक सम्यक मूल्यांकन 
  9. स्मृतियों में हार्वर्ड
  10. अंधा कवि

लेखक की अनूदित पुस्तकें

  1. अदिति की आत्मकथा
  2. पिताओं और पुत्रों की
  3. नंदिनी साहू की चुनिंदा कहानियाँ

लेखक की अन्य कृतियाँ

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