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चिड़िया बोली

(लोरी)
 
चिड़िया बोली, "दुद्धू  पी लो,
फिर मैं   सैर   कराऊँगी।
अपने पंखों पर बिठलाकर
दुनिया तुम्हें दिखाऊँगी।
 
पर्वत-घाटी के पीछे है
एक फलों का देश निराला।
छोटे पंछी-प्राणी को भी 
कोई नहीं सताने वाला।
वहाँ उड़ाकर ले जाऊँगी 
मीठे फल खिलवाऊँगी।
 
मेरे संगी-साथी सारे 
नीले-नीले नभ के बादल।
कभी-कभी वे बन जाते हैं
नैनों वाले काले काजल।
हाथ मिलाना मेघों से तुम
उनसे मैं   मिलवाऊँगी।

('पलकों में निंदिया' लोरी-संग्रह से)

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