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गप्पू बंदर की वैज्ञानिक जिज्ञासा: गुरुत्वाकर्षण की खोज

 

जंगल में एक दिन बड़ा ही रोचक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जंगल के सभी जानवर उत्साह से भरे हुए थे। मंच सजा था, रंग-बिरंगी पताकाएँ लहरा रही थीं और चारों ओर ख़ुशियों का माहौल था। आज 'जंगल रत्न विज्ञान पुरस्कार' की घोषणा होनी थी। 

लोमड़ी मैडम ने मुस्कुराते हुए कहा, “इस वर्ष का पुरस्कार जाता है गप्पू बंदर को।” 

यह सुनते ही तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। शेर महाराज ने स्वयं गप्पू को मंच पर बुलाया और उसे ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। गप्पू की आँखों में चमक थी और चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान। 

दरअसल, गप्पू हमेशा सोचता रहता था कि जब भी मैं पेड़ से कोई फल तोड़कर छोड़ देता हूँ, तो वह नीचे ही क्यों गिरता है? ऊपर क्यों नहीं जाता? 

उसकी यही जिज्ञासा उसे बाक़ी सबसे अलग बनाती थी। एक दिन उसने देखा कि पेड़ से गिरा आम ज़मीन पर ही आकर रुका। उसने पत्थर और पंख को भी गिराकर देखा। दोनों नीचे ही आए, भले ही गति अलग-अलग थी। गप्पू ने सोचा कि ज़मीन में ज़रूर कोई अदृश्य शक्ति है, जो सबको अपनी ओर खींचती है। 

वह रोज़ नए-नए प्रयोग करता। कभी ऊँचाई से कंकड़ गिराता, तो कभी पत्ते। उसने जल्दी ही यह समझ लिया कि धरती में कोई विशेष आकर्षण है। उसने अपने निष्कर्ष जंगल के सभी जानवरों के सामने रखे। 

शेर महाराज उसकी बात ध्यान से सुन कर बोले, “गप्पू, तुमने बहुत बड़ा रहस्य खोजा है। यह शक्ति ‘गुरुत्वाकर्षण’ कहलाती है। धरती हर वस्तु को अपनी ओर खींचती है, इसलिए सभी चीज़ें नीचे गिरते हैं।” 

सभी जानवर आश्चर्यचकित रह गए। ख़रगोश बोला, “वाह, इसीलिए हम ज़मीन पर टिके रहते हैं।” 

हिरण ने कहा, “अब समझ आया कि चीज़ें हवा में उड़कर ग़ायब क्यों नहीं हो जातीं।” 

गप्पू की मेहनत और जिज्ञासा ने उसे जंगल का सबसे होनहार वैज्ञानिक बना दिया। उस दिन से सभी जानवरों ने ठान लिया कि वे भी हर बात को समझने की कोशिश करेंगे और सवाल पूछने से कभी नहीं डरेंगे। 

सच्ची जिज्ञासा और लगातार प्रयास से ही ज्ञान की खोज होती है। छोटा हो या बड़ा, सवाल पूछने वाला ही सच्चा खोजकर्ता बनता है। 

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