अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

माता-पिता की चरण सेवा 

शुचि चरण रज माता पिता की,
 भाल  पर अवलेप  कर।
 
प्रभु  की  शरण  रहते  हुए ,
कर्तव्य   पूरे  शेष  कर।
 
हे! मनुज दिग्भर्मित  मत हो,
यह भव   हरण  का पंथ है।
 
माता पिता की चरण सेवा ,
जो   करे  बस वही सच्चा सन्त है 
 
इसके  बिना तो  व्यर्थ सारे ,
दान   जप  तप  मंत्र  हैं।
 
माता  पिता  के  रूप  में ,
परमात्मा   का   तंत्र  है।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

14 नवंबर बाल दिवस 
|

14 नवंबर आज के दिन। बाल दिवस की स्नेहिल…

16 का अंक
|

16 संस्कार बन्द हो कर रह गये वेद-पुराणों…

16 शृंगार
|

हम मित्रों ने मुफ़्त का ब्यूटी-पार्लर खोलने…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

उपलब्ध नहीं

उपलब्ध नहीं