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नव संवत्सर

नव संवत की बेला आयी। 
कलियों ने ओढ़ी तरुणाई। 
 
श्वासों की शाखों पर देखो, 
सुंदर पुष्प गुलाब खिले हैं। 
मादकता मधुबन में फैली, 
नयनों में महताब जले हैं। 
 
ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ हैं छाई। 
नव सम्वत की बेला आई। 
कलियों ने ओढ़ी तरुणाई। 
नव सम्वत की बेला आयी। 
 
ख़ुश्बू घुली फ़िज़ाओं में है, 
फ़सलें रँग रँगीली हैं। 
मधुर मास है छलका छलका, 
कलियाँ हुई नशीली हैं। 
 
ग्रीष्म ऋतु की आहट लायी। 
नव सम्तव की बेला आयी। 
कलियों ने ओढ़ी तरुणाई। 

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