क्या लिखूँ मैं
काव्य साहित्य | कविता डॉ. सुकृति घोष15 Sep 2026 (अंक: 302, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
आज थामकर मैं क़लम को, सोचती हूँ क्या लिखूँ मैं
बाग़ के नवपल्लवों की, मोहिनी मुस्कान लिख दूँ
या भ्रमर के गीत-गुंजन, मंजरी की लाज लिख दूँ
सात जन्मों के सफ़र में, मीत का मनुहार लिख दूँ
या प्रणय की रागिनी में, कुछ सुनहरे छंद लिख दूँ
दो दिलों में साथ झंकृत, ताल सुर अनुराग लिख दूँ
या विरह की वेदना में, विकल मन का ताप लिख दूँ
आज थामकर मैं क़लम को, सोचती हूँ क्या लिखूँ मैं
मेघराज के कृष्ण मुख पर, कल्पना के रंग लिख दूँ
या पवन के पर लगाकर, व्योम में सतरंग लिख दूँ
तेज़ चलती ज़िंदगी में, साँझ का ठहराव लिख दूँ
या सुबह की रोशनी में, आस का विश्वास लिख दूँ
राधिका की प्रीत या फिर द्रौपदी का मान लिख दूँ
या मनोहर श्याम सुंदर की मुरलिया तान लिख दूँ
आज थामकर मैं क़लम को, सोचती हूँ क्या लिखूँ मैं
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