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नरेन्द्र श्रीवास्तव - 2

हाइकु - 2

स्वप्न टूटे तो
काँटे चुभने लगे
झरी पाँखुरी।
*
तेरे बग़ैर
लम्हा पिन चुभाये
चाँद हंसिया।
*
कागा बोला तो
तन्हाई फड़कती
शगुन शुभ।
*
तेरे आने से
महक उठा दिल
मधुबन-सा।
*
ग्रीष्म मौसम
शापित पतझड़
दुःखी पवन।
*
सूरज करे
धरा अभिनंदन
प्रकाश पुष्प।

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