हरे-पीले पपीते
बाल साहित्य | बाल साहित्य कविता नरेंद्र श्रीवास्तव15 Sep 2019
हरे पपीते कच्चे-कच्चे।
पीले पके पपीते अच्छे॥
देख पपीता मन ललचाये।
पानी मुँह में झट आ जाये॥
पेड़-पपीता सुंदर दिखता।
खुली हुई छतरी-सा लगता॥
गुल्लक में ज्यूँ सिक्के होते।
बीज पपीते के त्यूँ होते॥
मीठा फल, रस खूब भरा है।
खाया मिलकर प्यार बढ़ा है॥
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