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तू भी दुःखी है

रूठना गर तेरी फ़ितरत
सोचता हूँ कैसी आफ़त
होती थोड़ी फिर भी राहत
गर तेरा ग़ुस्सा हो रुख़सत॥
रूठने से मैं दुःखी हूँ, मैं नहीं तू भी दुःखी है॥

हैरत-ए-अंगेज़ फ़ितरत
ज़िंदगी कर रही कसरत 
कसरत से सेहत सुधरती 
यहाँ तो सेहत बिगड़ती॥
रूठने से मैं दुःखी हूँ, मैं नहीं तू भी दुःखी है॥

रूठते ही तेरा चेहरा 
बदसूरती का विकराल सेहरा 
बदसूरती में ख़ूबसूरती का पहरा
मुखड़े पर गर शरारत का पहरा॥
रूठने से मैं दुःखी हूँ, मैं नहीं तू भी दुःखी है॥

तेरे रूठते ही बाग़वां रूठा
ए कली मेरा दिल रूठा 
दिल ए बाग़ में सिर्फ़ पतझड़ देखा
ज़िन्दगी का रंग ग़मगीन मैंने देखा॥
रूठने से मैं दुःखी हूँ, मैं नहीं तू भी दुःखी है॥

तू रूठी मानो अल्फ़ाज़ रूठे 
ज़ुबां पर मायूसी के मंज़र टूटे 
मासूमियत भरा मायूसी सफ़र
तेरे बिना बाग़ में जाऊँ किधर॥
रूठने से मैं दुःखी हूँ, मैं नहीं तू भी दुःखी है॥

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