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फ़ंड का रहस्यमयी कुंड: सरकार भेजती है, धरती निगल जाती है!

 

माननीय मुख्यमंत्री जी, 

यह तो सत्य है कि आप पूरे राज्य का कायाकल्प करना चाहते हैं। लेकिन समस्या यह है कि जैसे ही आपका भेजा हुआ फ़ंड ज़िले में प्रवेश करता है, वह रहस्यमयी कुंड में समा जाता है! अब यह कुंड कहाँ है, कौन इसे भर रहा है, और कौन इसमें गोते लगा रहा है—यह आज तक कोई नहीं जान पाया। 

“सड़क निर्माण विभाग का हाथ, कुंड के साथ”

हमारे सड़क निर्माण विभाग के कर्मचारी इतने कर्मठ हैं कि आपके फ़ंड की एक झलक भी नहीं देखने देते—पलक झपकते ही उसे कुंड में समर्पित कर देते हैं। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सड़क निर्माण का काम पूरी ईमानदारी से किया जाता है, लेकिन जब सड़कें पहली बारिश में ही बह जाती हैं, तो यही अधिकारी कह देते हैं—“बारिश ज़्यादा हो गई, हमें क्या पता था!”

“फ़ंड की गति को कोई नहीं रोक सकता”

मुख्यमंत्री जी, फिजिक्स का नियम भी कहता है कि कोई भी शक्ति ऊर्जा को नष्ट नहीं कर सकती, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदल सकती है। लेकिन हमारे ज़िले के अधिकारी इस नियम से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि सरकारी फ़ंड आता तो है, पर उसका कोई स्थायी रूप नहीं होता—कभी सड़क के नीचे चला जाता है, कभी किसी निजी भवन की नींव में, तो कभी किसी बैंक खाते की गहराई में समा जाता है! 

“सड़कें बनती भी हैं, और नहीं भी”

सड़क निर्माण विभाग कहता है कि सड़कें बन रही हैं, लेकिन जनता कहती है कि दिखाई नहीं देतीं। अधिकारियों का जवाब बड़ा वैज्ञानिक है—“आपको सड़कें दिख नहीं रहीं, इसका मतलब यह नहीं कि वे हैं नहीं। यह क्वांटम फिजिक्स का मामला है!”

“फ़ंड कुंड से बाहर कब आएगा?” 

हमारी विनम्र प्रार्थना है कि एक दिन इस रहस्यमयी कुंड की खुदाई हो, ताकि यह पता चल सके कि हमारे टैक्स का पैसा आख़िर किस रहस्यलोक में चला जाता है। जब तक यह कुंड भरा नहीं जाएगा, तब तक सड़कें भी गड्ढों से भरी रहेंगी और हम भी इसी उम्मीद में रहेंगे कि शायद अगली बार का फ़ंड सड़कों तक पहुँच ही जाए! 

तो माननीय मुख्यमंत्री जी, अगर आपको सच में राज्य का कायाकल्प करना है, तो पहले इस “फ़ंड निगलने वाले कुंड” की पूजा-अर्चना करवाइए, हो सकता है कि कोई चमत्कार हो जाए! 

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