हमारे वृद्ध
काव्य साहित्य | कविता डॉ. प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार1 Oct 2023 (अंक: 238, प्रथम, 2023 में प्रकाशित)
बुज़ुर्गों के हाथ आशीर्वाद
के लिए उठे तो अच्छे लगे
यह दौलत, शोहरत, नाम
यहीं छूट जाना है रहना है
सिर्फ़ इंसानियत और इंसान
यह चिंतन मनन और मंथन
अनुभव, तजुर्बा, गहनता
वृद्ध फलदार वृक्ष की तरह
हँसते, मुस्कुराते आशीष देते
तटस्थता, सहजता, सरलता
प्रकृति से सब कुछ पाकर
संवेदनाओं, सौम्यता, पूर्णता
प्रकृति को फिर लौटते हुए
हलचल में भी निर्मल, शांत
अपने ज्ञान की धरोहर को
दूसरों को आवंटित करते
विविध परिदृश्य में कुशलता
से तादम्य स्थापित करते
शीतल जल सा स्नेह लेपन
मृदु वचन वाणी से झरते
ऐसे कुछ वृद्ध जन होते हैं
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और असली हक़ीक़त
- अपराध की एक्सप्रेस: टिकट टू अमेरिका!!
- अस्त्र-शस्त्र
- आओ ग़रीबों का मज़ाक़ उड़ायें
- आहार दमदार आज के
- एमबीबीएस बनाम डीआईएम
- कचरा संस्कृति: भारत का नया राष्ट्रीय खेल
- क़लम थामी जब
- काम क्यों करें?
- गर्म जेबों की व्यवस्था!
- चंदा
- जनसंख्या नियंत्रण: अब कोई योजना नहीं, बस हालात
- जल विभाग का राष्ट्रीय शिक्षा अभियान: ‘जल ही जीवन है’
- झुकना
- टमाटर
- टीवी डिबेट: बहस कम, तमाशा ज़्यादा
- ड्रम युग: आधुनिक समाज का नया फ़र्नीचर
- ताक़तवर कौन?
- दूल्हा चाहिए . . . पर बेटा नहीं!
- देश के दुश्मनों की देशभक्ति
- पेट लवर पर होगी कार्यवाही
- प्री-वेडिंग का पहरा
- फ़ंड का रहस्यमयी कुंड: सरकार भेजती है, धरती निगल जाती है!
- मज़ा
- यमी यमी मिल्क राइस
- रफ़ा-दफ़ा
- रीलों की दुनिया में रीता
- विदेश का भूत
- विवाह आमंत्रण पिकनिक पॉइंट
- विवाह पूर्व जासूसी अनिवार्य: वरमाला से पहले वेरिफ़िकेशन
- संस्कार एक्सप्रेस–गंतव्य अज्ञात
- सावित्री से सपना तक . . .
- होली का हाहाकारी हाल: जब रंगों ने पहचान ही मिटा दी!
कविता
- अपने हक़ को जाने
- एक सीट ख़ाली है
- कान्हा
- कितने प्यारे थे वो दिन
- गांधारी का मौन रहना
- ज़िंदगी कहती है
- नदी
- नदी और नारी
- पन्ना धाय
- पापा की यादें
- प्रार्थना
- बस रह गई तन्हाई
- माता–पिता की वृद्धावस्था: एक मौन विलाप
- मानव तुम कहलाते हो
- वह कौन साथ निभाएगा . . .
- शिक्षक
- सभ्यता के कफ़न में लिपटी हैवानियत: एक महाकाय व्यंग्य
- सावन आया
- सावन मनभावन
- स्त्री—हर युग में कटघरे में
- हमारे वृद्ध
- हिंदुस्तान महान है
लघुकथा
हास्य-व्यंग्य कविता
सांस्कृतिक आलेख
अनूदित कविता
नज़्म
चिन्तन
कहानी
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं