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धर्म का सीधा अर्थ कर्त्तव्य से है

 

धर्म का सीधा अर्थ कर्त्तव्य से है 
जबकि पंथ मार्ग का ही पर्याय है। 
पंथ भिन्न हो सकते हैं:
मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, हिन्दू आदि आदि 
लेकिन कर्त्तव्य सदा अटल और अडिग रहता है 
इसीलिए वह सनातन होता है, 
इसीलिए वह धर्म कहलाता है। 
इसी कर्त्तव्य परायणता की 
दुहाई हर युग में युग पुरुष देते आए हैं 
और इसी का वे सदैव पालन करते आए हैं 
और इसी को धर्म बोलते आए हैं। 
इस तरह सनातन धर्म सभी पंथों को 
मानना और अपनाना चाहिए। 
यही मानवता का धर्म है 
यानी कर्त्तव्य है। 

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