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क़िस्मत की लकीरों ने 

क़िस्मत की लकीरों ने 
मुझे तुझसे जुदा कर दिया। 
कमी तो नहीं थी हमारे इश्क़ में
शरीक ए इश्क़ ने हमें रुला कर रख दिया। 
क़िस्मत की लकीरों में
एक लकीर इश्क़ की भी उकेरनी है
वादा है मेरा तुझसे, ए हसीं! 
इश्क़ ए चादर तेरे क़दमों में बिखेरनी है॥

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