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कौन कहता है . . .

कौन कहता है
परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है? 
जो कहते हैं
वे वास्तव में अल्पज्ञ ही हैं। 
प्रकृति तो हमेशा से शाश्वत थी, है
और हमेशा रहेगी। 
अगर ऐसा न होता तो
चाँद रात्रि में चाँदनी बिखेरना छोड़ देता। 
अगर ऐसा न होता तो
सूरज धरती को प्रकाशित करना छोड़ देता। 
अगर ऐसा न होता तो
ये सम्पूर्ण प्रकृति नियमों पर चलना छोड़ देती। 
प्रकृति तो अपने नियम पर
आदि से अटल अविराम चलती रही है
और आगे भी चलती रहेगी। 
केवल भौतिक रूप में ही परिवर्तन
इस सृष्टि पर होते आए हैं और होते रहेंगे। 
इसी तरह देवपुरुष अपने धर्मपथ पर
अडिग हैं और हमेशा रहेंगे। 
तुच्छ मानव ही अपना रास्ता भटकते आए हैं
और आगे भी भटकते रहेंगे। 
अपने तुच्छ स्वार्थों की ख़ातिर
अपनी मर्ज़ी से प्रकृति में बदलाव करते रहेंगे
उस प्रकृति से छेड़छाड़ करते रहेंगे॥

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