अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

ख़ुशफहमियाँ

बहुत सी ख़ुशफ़हमियाँ पाली थीं मैंने!

जब कभी भीड़ से गुज़री
स्वयँ को अलग पाया,
मेरी विशिष्टताऒं ने
जैसे मेरे चेहरे को
रंग दे दिया हो कुछ अलग ही!

मेरे संघर्ष,
मेरी उपलब्धियाँ,
मेरी उदासियाँ,
मेरी हँसी
जैसे कुछ अद्वितीय हो,
जैसे मैं कुछ अधिक मनुष्य हूँ
शेष सब से,
अधिक संघर्षशील,
अधिक प्रसन्न,
अधिक गहरे उतरी हुई!

जैसे आकाशगंगा मे
चमकता एक तारा
इतरा उठे
अपनी अनोखी
दिपदिपाहट पर
जैसे कोई फूल
उठे फूल
अपनी अतिरिक्त महक पर,

घास का तिनका
झूम उठे
अपने गहरे हरे रंग पर!

ठीक वैसे..............

पर समय ने आँख खोल
दिखाया,
समाज ने
अनेको उदाहरणों से
समझाया...

कि अद्वितीय है
हर व्यक्ति भीड़ में,
विशिष्ट है
अपनी सामान्यताओं में
पैठा हुआ है
गहरे
अपने मन और तन की अनुभूतियों में!
समझ में बड़ा है,
संघर्ष की दौड़ में
सबके साथ
बराबर से खड़ा है!!

प्रसन्न हूँ,
कि इन अद्वितीयों की
भीड़ का एक हिस्सा हूँ,
और हज़ारों कहानियों के बीच
एक मामूली सा क़िस्सा हूँ॥

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

साहित्यिक आलेख

पुस्तक चर्चा

कविता

नज़्म

कहानी

कविता - हाइकु

पुस्तक समीक्षा

कविता-मुक्तक

लघुकथा

स्मृति लेख

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं