अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

ओ ख़ुदा

राह मुझे दिखलाता चल
ऊँच नीच समझाता चल
जीवन की पगडण्डी पर
प्रकाश किरन बिखराता चल

राह मुझे दिखलाता चल...

भूली भटकी यह काया है
समझ इसे न अब तक आया है
क्यों है जीवन, क्या है जीवन
भीतर कौन समाया है
और न यूँ तरसाता चल

गुत्थी यह सुलझाता चल
राह मुझे दिखलाता चल...

दुनिया है क्यों ग़म का मेला
सुख है चन्द पलों का खेला
हम आते तो हैं धूम मचाते
जाते ज्यों पानी का रेला
इतना तू बतलाता चल

फिर जो चाहे करवाता चल
राह मुझे दिखलाता चल...

सुन्दर उजली वो बूँद कहाँ है
नभ से उतरी वो परी कहाँ है
कोलाहल से भरे जगत में
वो रूहानी आवाज़ कहाँ है
तू रुह मेरी सहलाता चल

प्रेम सुधा बरसाता चल
राह मुझे दिखलाता चल....

मुझको दे दे ध्यान अपना तू
मुझको दे दे ज्ञान अपना तू
बेचैनी को राहत दे जो
भेज वहाँ से दूत अपना तू
भले खिलौनों से बहलाता चल
पर मुझको न ठुकराता चल

राह मुझे दिखलाता चल
ऊँच नीच समझाता चल...

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अनगिन बार पिसा है सूरज
|

काल-चक्र की चक्र-नेमि में अनगिन बार पिसा…

अबके बरस मैं कैसे आऊँ
|

(रक्षाबंधन पर गीत)   अबके बरस मैं कैसे…

अम्बर के धन चाँद सितारे 
|

अम्बर के धन चाँद सितारे   प्रथम किरण…

अवध में राम आए हैं
|

हर्षित है सारा ही संसार अवध  में  …

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

नज़्म

कविता - हाइकु

ग़ज़ल

गीत

अनूदित कविता

लघुकथा

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं