पति कल्याण योजना
हास्य-व्यंग्य | हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी जयचन्द प्रजापति ‘जय’1 Jun 2026 (अंक: 298, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
सोने की कम ख़रीददारी करने का आह्वान सुनकर पतियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है। कुछ तो झूम उठे कि ऐसे युद्ध होते रहेंगे तो सोने ख़रीदने के दिन चले जायेंगे और जो पति दो रोटी खाते थे अब पाँच रोटियाँ रगड़ दे रहे हैं। वे जान रहे हैं कि अब सोना ख़रीदना नहीं है जो पैसा बचेगा वह अपने सेहत पर ख़र्चा किया जायेगा।
आख़िर आ ही गए सुख के दिन। यह कल्याणकारी योजना पतियों के लिए लॉन्च की गई बहुत बढ़िया स्कीम है। इससे ख़ुशहाली आएगी। बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी। अब पत्नियाँ पतियों पर सोना ख़रीदने का दबाव नहीं बना सकती हैं।
दुखीराम जिस दिन से यह ख़बर सुन है कि सोने की ख़रीददारी से बचें—दुखीराम आज बहुत प्रसन्न मुद्रा में हैं। कई मंदिरों में पूजा पाठ भी कर आये और हफ़्ते में दो दिन व्रत रहने का संकल्प लिया कि हमारी सरकार को ऐसी सद्बुद्धि हमेशा के लिए बनी रहे ताकि हम लोग पत्नियों द्रारा सोने के नाम पर प्रताड़ित न हो सके। अब पत्नी की चली आ रही कई वर्षों से झुमके की माँग स्थगित हो जाएगी। यह राहत भरी ख़बर है।
यह समाचार सुशीला के ऊपर गिरा वज्रपात से कम नहीं है। वियोग रस से परिपूर्ण ख़बर जब से सुनी है, उसका हृदय और मन बहुत बुझा-बुझा सा हो रहा है। उसने कई सालों से सपना बना रखा है एक झुमके का और वादे के मुताबिक़ पति महोदय का इस बार देने का प्लान चल रहा था। इसी समय पर यह ज़रूरी ख़बर भी बुरी ख़बर से कम नहीं।
पतियों ने जगह-जगह जुलूस निकाले हैं और इसको एक देशव्यापी सरकारी सूचना को समझ कर पतियों को जागरूक किया जा रहा है।
सरकार का यह नियम कल्याणकारी योजनाओं में से एक है जो पतियों के चेहरे पर मुस्कान लाने में कामयाब है। पतियों के लिए यह ख़बर एक ख़ुशी की लहर से कम नहीं है।
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
10 मिनट में डिलीवरी भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | वीरेन्द्र बहादुर सिंहनवरालाल ने ख़ुशी जताते हुए कहा, “दस…
60 साल का नौजवान
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | समीक्षा तैलंगरामावतर और मैं लगभग एक ही उम्र के थे। मैंने…
(ब)जट : यमला पगला दीवाना
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | अमित शर्माप्रतिवर्ष संसद में आम बजट पेश किया जाता…
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
बाल साहित्य कहानी
कविता
किशोर साहित्य कहानी
बाल साहित्य कविता
हास्य-व्यंग्य कविता
कहानी
लघुकथा
ललित निबन्ध
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं