उनका हिस्सा
काव्य साहित्य | कविता जयचन्द प्रजापति ‘जय’1 Jul 2026 (अंक: 300, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
चमचमाती गाड़ियाँ
चमचमाते लोग
उनके बड़े-बड़े महल
उनके वे रुसूख़
एक भीड़
जो उनके साथ खड़ी है
उनके पास
जो धनबल, बाहुबल है
सड़क पर
रात जो गुज़ार रहे हैं
उन रुसूख़दारों से
कोई मतलब नहीं हैं
बस उनकी
एक पीड़ा है
उनके हिस्से पर
रुसूख़दारों का मजमा लगा हैं
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