उनका हिस्सा
काव्य साहित्य | कविता जयचन्द प्रजापति ‘जय’1 Jul 2026 (अंक: 300, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
चमचमाती गाड़ियाँ
चमचमाते लोग
उनके बड़े-बड़े महल
उनके वे रुसूख़
एक भीड़
जो उनके साथ खड़ी है
उनके पास
जो धनबल, बाहुबल है
सड़क पर
रात जो गुज़ार रहे हैं
उन रुसूख़दारों से
कोई मतलब नहीं हैं
बस उनकी
एक पीड़ा है
उनके हिस्से पर
रुसूख़दारों का मजमा लगा हैं
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
कविता
- आदिवासी बच्चियाँ
- उनका हिस्सा
- उषा का आगमन
- एक थे अटल
- एक नाबालिग़ लड़की
- कोहरा
- कोहरे में
- देश के नेताओ
- निष्ठुर समय
- पर्वत, जो मूक खड़े हैं
- पीढ़ियाँ
- पूस की रात
- बसंत
- मत सताना
- मेरी कवितायें
- मेरी दृष्टि
- मैंने भागकर शादी कर ली
- वह मज़दूर
- सर्दी में एक स्त्री
- सुकून चाहता हूँ
- हम वेश्या हैं
- हँसने दो
- हारे लोग
- हे नवांकुरो
बाल साहित्य कविता
चिन्तन
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
बाल साहित्य कहानी
किशोर साहित्य कहानी
हास्य-व्यंग्य कविता
कहानी
लघुकथा
ललित निबन्ध
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं