अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

जीवन

फिर-फिर कवि मुझ को गाता है,
मैं जीवन हूँ।

विरला ही मुझ को पाता है
मैं जीवन हूँ।
हँस मैं बोला-तुम मुस्काये,
पलकों पर सपने सज आये,
आशा की दुल्हन पर वारे
तुमने विश्वासों के धागे,
मेरे भीतर ही ढूँढे थे
तुमने अपने अनगिन प्यारे।
मैं जीवन हूँ।।

मैं रूठा-तुम रो आये
दुर्दिन में कितना घबराये,
अपने बिछड़े, अपना बिछड़ा
मुझसे उखड़ कहाँ बस पाये?
इतने गहरे गिरे कि
खु़द से भी मुँह रहे छिपाये।
मैं जीवन हूँ ।।

थाह मेरी पाने को कविवर
भावों की गलियों में घूमे,
पूनम की अँगड़ाई देखें
तारों की अँगनाई झूमें,
अपना आपा भुला पीर के
काँटे, निज नयनों से चूमें।
मैं जीवन हूँ।।

कोई रहा उपेक्षा करता
कोई खड़ा अपेक्षा करता,
खंजन नयन बना कोई रागी
मानस हँस तिरा बैरागी,
हँस कर चाँद चढ़ा साहसी
रो भागा छिप रहा आलसी।
मैं जीवन हूँ।।

लहरों का आना-जाना है
कैसे गिनें, पहल की किसने,
सुख-दुख ने भी खूब नचाया
रस्सी पकड़ाई जिस-जिसने,
सागर सीप समाया जिसने
मोती गहरे पाया उसने।
मैं जीवन हूँ।।

।।। मैं जीवन हूँ।।।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

साहित्यिक आलेख

पुस्तक चर्चा

कविता

नज़्म

कहानी

कविता - हाइकु

पुस्तक समीक्षा

कविता-मुक्तक

लघुकथा

स्मृति लेख

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं