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किनारे पर मैं हूँ

नई दिशा नया जीवन
साथ-साथ लेकर
मैं अब मैं को छोड़ आया।
 
नींद खुली थी जिस आँगन,
साँझ ढली थी जिस देहरी पर
वो घर वो द्वार छोड़ आया 
नई दिशा नया जीवन
साथ-साथ लेकर,
मैं अब मैं को छोड़ आया।
 
घुट रही थी साँसें जिनमें
वो अँधेरी गलियाँ,
भटक रही थी रूह जिनमें
वह अँधेरी रतियाँ,
अपरिचित था इतिहास जहाँ
वह ज़मीं, वो आसमां छोड़ आया
नई दिशा नया जीवन
साथ-साथ लेकर,
मैं अब मैं को छोड़ आया।
 
किसी रिश्ते का ज़ख़्म नहीं
कोई शिकवा कोई रंज नहीं
मैं इंसान के इस खेल से
ख़ुद को दूर छोड़ आया
नई दिशा नया जीवन
साथ-साथ लेकर,
मैं अब मैं को छोड़ आया।
 
जो समझे थे मेरी ज़िन्दगी के मायने
जो निकले थे अपने हृदय की गर्त से
मुझे गले लगा सामने,
बस उनके मुस्कानों में
अपनी मुस्कान छोड़ आया
नई दिशा नया जीवन
साथ-साथ लेकर,
मैं अब मैं को छोड़ आया।

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