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आकर्षण का नियम 

 

हम सभी जाने-अनजाने में इस नियम का प्रयोग कर रहे हैं, मगर असल जीवन में इससे पूर्णतः अनभिज्ञ हैं। यह नियम नैसर्गिक हैं, अटल, अविनाशी है। यह नियम हमारे जीवन का निर्माण कर रहा हैं। संपूर्ण सृष्टि, इसके प्राणी, जीव-जंतु और मानव सभी इसी नियम पर अपना जीवनयापन कर रहे हैं। 

आकर्षण का नियम एक ‘रहस्य’ है। यह एक ऐसा रहस्य है, जो हमारी आँखों के सामने होकर भी हमसे ओझल है। इस रहस्य के प्रयोग से हम अपने संपूर्ण जीवन को बदल सकते हैं। चाहे आज आप किसी भी परिस्थिति में हों, किसी भी संकट से जूझ रहे हों, जीवन की सारी उम्मीदें ख़त्म हो चुकी हों। चाहे आप निराशा के दलदल में फँस चुके हों। इसके बावजूद भी रहस्य के प्रयोग से आप अपना जीवन बदल सकते हैं। 

यह लेख मैं अपने निजी जीवन से प्रेरित होकर लिख रही हूँ। जिस रहस्य के प्रयोग से मैंने अपने जीवन में परिवर्तन देखा, मैं उसे ही आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ। और सच बताऊँ, मैंने भी अनजाने में इस रहस्य का प्रयोग किया है। किन्तु जीवन में चमत्कारी परिवर्तन के बाद, मैंने इस रहस्य की असल परिभाषा और अर्थ को जाना। 

आइए इस रहस्य को विस्तार से समझते हैं:

आकर्षण का नियम कहता है—“आप जिस प्रकार के विचार अपने मस्तिष्क में रखते हैं, आप वैसी ही परिस्थितियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। चूँकि आपके विचार एक चुंबकीय सिग्नल ह। जो अपने जैसे अनेक विचारों को अपनी ओर खींचता हैं।”

उदाहरण के तौर पर, जो व्यक्ति यह सोचता या बोलता है, कि उसका जीवन बर्बाद हो चुका है, उसके जीवन से दुःख ख़त्म नहीं होते, उसका शरीर निरोगी नहीं रहता है, पैसे नहीं टिकते, हर समय बुरा होता रहता है। अच्छे दिन नहीं आते। अच्छे लोग नहीं मिलते। वह मोटा है, बदसूरत दिखता है, उसे कोई पसंद नहीं करता। 

तो असल में उसके साथ यही सब होता चला जाता हैं। यहाँ तक कि एक बुरा विचार अपने जैसे कई सारे बुरे अनुभव को अपने साथ ले कर आता है। और वह व्यक्ति अपने जीवन को एक चक्र में फँसा हुआ महसूस करता हैं। 

यदि आपको इस चक्र से बाहर निकलना ह, तो आकर्षण का नियम एक मात्र उपाय है। इस नियम के प्रयोग से आप अपने जीवन को मनचाहा आकर दे सकते हैं। 

इसके विपरीत कोई ऐसा व्यक्ति, जो हर समय सफलता, पैसे या अच्छे जीवन की कल्पना करता रहता है। चाहे उसके पास इन्हें हासिल करने का कोई रास्ता ना हो, मगर फिर भी वह अपने विचारों की पृष्ठभूमि पर, अपने अच्छे जीवन की कल्पना का कैनवस उकेरता रहता है। तो आप देखेंगे, की एक दिन उसकी कल्पना वास्तविकता में बदल जाती है, वह सबकुछ हासिल कर लेता है। 

हमारा ब्राह्मण सर्वशक्तिशाली हैं, आप अपनी मनचाही हर चीज़ ब्राह्मण से प्राप्त कर सकते हैं। ब्राह्मण शब्द नहीं समझता, वह हमारी फ्रिक्वेंसी को पकड़ता हैं। आपके विचार जिस फ्रिक्वेंसी पर सेट होंगे, ब्राह्मण उसे ही रियलिटी में बदल देगा। 

अतः संक्षेप में आकर्षण का नियम यही बताता हैं, “जैसा सोचोगे, वैसा बन जाओगे।”

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