लाये सिंघाड़े
बाल साहित्य | किशोर साहित्य कविता डॉ. सत्यवान सौरभ15 Nov 2024 (अंक: 265, द्वितीय, 2024 में प्रकाशित)
(बाल दिवस विशेष)
ठेले भर लाये सिंघाड़े के।
दिन आए फिर जाड़े के॥
पानी में ये मोती उगता।
सुंदर रूप तिकोना दिखता॥
जाड़े में हर बार ये आता।
सबके मन को ख़ूब भाता॥
बच्चो इसके गुण भरपूर।
क़ब्ज़ बदहजमी करता दूर॥
इसमें फ़ाईबर, प्रोटीन रहता।
ब्लड प्रेशर सब ये सहता॥
व्रत त्योहार इससे मनती।
हलवा रोटी इससे बनती॥
जब भी तुम जाओ बाज़ार।
सिंघाड़े लाओ हर बार॥
लाकर ख़ूब सिंघाड़े खाओ।
सेहत अपनी अच्छी बनाओ॥
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