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मुरली मनोहर श्याम

 

भादों की अष्टमी की रात,
आए कृष्ण कन्हैया।
मथुरा के उस कारागार में,
जन्मे देवकी मैया।
 
कंस के प्रहरी सोए सारे,
खुल गए कारा-द्वार।
चमत्कार से राह बनी फिर,
चमके नंद-दुलार।
 
वासुदेव ने शीश नवाया,
लेकर नन्हें लाल।
डलिया में रख पार की यमुना,
बरसे मेघ विशाल।
 
घन-घोर घटा, बिजली चमकी,
यमुना चढ़ी अपार।
शेषनाग ने फन फैलाया,
बनकर उनका छत्राकार।
 
नंद भवन में बालक पहुँचे,
ख़ुशियों से भर गए द्वार।
यशोदा मैया गोद में लेकर,
निहारे बारंबार।
 
नटखट नंदलाल कहाए,
माखन के रखवाल।
माखन चुराएँ, मन भी चुराएँ,
सबके प्यारे लाल।
 
श्यामल तन और कजरारे नैन,
मुख पर मधुर मुस्कान।
माथे मोर-मुकुट सजा है,
मन मोहें भगवान।
 
पीताम्बर तन पर लहराए,
वैजयंती का हार।
अधर धरे जब मधुर मुरलिया,
झूम उठे संसार।
 
कदंब तले जब मुरली बाजे,
गूँजे मधुर तान।
गाय-ग्वाल सब दौड़े आएँ,
छोड़-छोड़कर काम।
 
राधा के मनमोहन प्यारे,
ब्रज के राज-दुलार।
राधा-कृष्ण का पावन प्रेम,
जग में सबसे न्यारा।
 
कालिय नाग का दर्प मिटाया,
यमुना हुई पवित्र।
गोवर्धन को उँगली पर धारा,
रखा ब्रज सुरक्षित।
 
इंद्र-वज्र से ब्रज को बचाया,
बनकर सबके नाथ।
दीन-दुखी जो शरण में आए,
थामा उसका हाथ।
 
मथुरा जाकर कंस संहारा,
टूटा दुष्टों का अभिमान।
धर्म-रक्षा का व्रत निभाया,
रखा जगत का मान।
 
सखा सुदामा द्वार आए,                     
पोटली काँख में दवाए।
दुर्बल काया फटे हाल।
हँसते उन पर द्वारपाल
मिलन मित्र से दौड़े कृष्ण,
नंगे पैर बेसुध बेहाल।
 
चरण पखारे प्रेम से उनके,
नयनों से बहे जलधार।
ऐसी मित्रता अमर हो गई,
जग में अनुपम  मिसाल।
 
द्रौपदी की लाज बचाई, 
अर्जुन के बने सारथी।
धर्म-युद्ध में सत्य जगाया,
बनकर जग के स्वामी।
 
कुरुक्षेत्र के रण में बोले,
गीता का उपदेश।
कर्म करो, फल की चिंता मत,
यही दिया संदेश।
 
मुरली वाले, मोरपंख वाले,
श्याम हमारे नाथ।
जिसने मन से नाम पुकारा,
थामा उसका हाथ।
 
भक्तवत्सल, दीनदयालु,
करुणा के भंडार।
राधा के प्यारे, नंद-दुलारे,
तुमसे जग उजियार।
 
इतनी कृपा करो हे कान्हा,
मन में बसो सदा।
जन्म-जन्म तक चरणों में रखो,
टूटे न प्रेम-डोर कभी।
 
श्यामल तन, कजरारे नैन,
अधर मधुर मुस्कान।
माथे मोर-पंख लहराए,
जय हो नंदलाल।
 
राधे-राधे नाम जो जपे,
उसका हो कल्याण।
मुरली मनोहर श्याम हमारे,
तुम ही जीवन-प्राण।
 
जय श्रीकृष्ण, जय नंदलाला,
जय राधे के प्यारे।
मुरली मनोहर, गिरधर नागर,
हम हैं शरण तुम्हारे। 
 
जय श्रीकृष्ण, जय नंदलाला,
जय राधे के प्यारे।
मुरली मनोहर, गिरधर नागर,
"हम हैं शरण तुम्हारे।"

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