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ज़िंदगी कहती है

 

पथरीली, टेढ़ी-मेढ़ी यह ज़िंदगी, 
मकड़ी के जाले-सी दिखे ज़िंदगी। 
एक उम्र में हारी हुई लगे ज़िंदगी, 
मुश्किल समय में बस करे बंदगी। 
ख़ुद से न हार जाना कहे ज़िंदगी। 
हौसले दिल में जगाओ तो सही, 
उठो ज़रा चलकर दिखाओ तो सही। 
सपनों को साकार कर दिखाओ तो सही, 
अपने इरादों को निभाओ तो सही॥
 
कभी थककर टूट जाते हो, 
भीतर ही भीतर बिखर जाते हो। 
चेहरे को चेहरे में छुपाते हो, 
रात में सिसकियों में डूब जाते हो॥
कभी हालत इतनी भारी हो पड़े, 
साँसों के रिश्ते भी बोझ लगें। 
आँखों में अँधेरा उतर आता है, 
आदमी ख़ुद से ही डर जाता है॥
 
कभी वह सोचता है चुपचाप, 
ख़त्म कर दूँ दुखों का अभिशाप। 
पर कहीं भीतर एक लौ जलती रहती है, 
धीरे से उम्मीद की बात कहती रहती है—
“अभी मत हार, अभी रात बाक़ी है, 
तेरे हिस्से की एक सुबह बाक़ी है। 
आज जो दर्द तुझे रुला रहा है, 
कल वही तुझे मज़बूत बना रहा है।”
वो अपने ग़म ख़ुद आँखों में पी जाता है, 
दर्द किसी से नहीं कह पाता है। 
भीड़ में भी तन्हा चलना सीख जाता है, 
और टूटकर भी सँभलना सीख जाता है॥
 
जिसे दुनिया आसान सफलता समझती है, 
वो बरसों की ख़ामोश तपस्या होती है। 
कितनी रातें रोकर काटी जाती हैं, 
तब कहीं जीत की सुबह आती है॥
 
जो आज मंचों पर मुस्कुराते दिखते हैं, 
वो भी कभी अँधेरों में गुमनाम रहे हैं। 
हर चमकती हुई कहानी के पीछे, 
अनगिनत दर्द छिपे होते हैं सीने के नीचे॥
ग़म को चिंगारी बनाओ तो सही, 
अपने आँसूँ छुपाकर मुस्कुराओ तो सही। 
आज जो तुझ पर हँस रहे हैं राहों में, 
कल वहीं तेरा सम्मान करेंगे चाहों में॥
 
फिर दौड़कर मिलने आएँगे, 
हर महफ़िल में दोहराएँगे—
“मेरा दोस्त है . . . ” कहकर वो, 
तेरे क़िस्से सबको सुनाएँगे॥
दुनिया का बस यह मेला है, 
मतलब पर चलता रेला है। 
सुख में सब अपने लगते हैं, 
दुख में हर चेहरा अकेला है॥
पर रिश्ते ऐसे बनते हैं, 
जो आँसू पढ़ना जानते हैं। 
जो दर्द में साथ निभाते हैं, 
वो ही अपने कहलाते हैं॥
मत हार कभी ऐ मेरे दोस्त, 
दर्द ही बनता जीवन-जोश। 
जो आँसू आज छुपाए हैं, 
कल बन जाएँगे तेरी सोच॥
 
जिस दिन तू ख़ुद से जीत गया, 
हर ग़म का बादल बीत गया। 
तेरी ख़ामोशी गीत बनेगी, 
तेरा संघर्ष संगीत बनेगा॥
 
फिर दुनिया तुझको पढ़ेगी, 
तेरी हिम्मत पर “वाह” कहेगी। 
तेरे क़दमों के निशानों को, 
नई पीढ़ी राह कहेगी॥
 
हौसले दिल में जगाओ तो सही, 
उठो ज़रा चलकर दिखाओ तो सही। 
सपनों को साकार कर दिखाओ तो सही, 
ज़िंदगी को जीतकर दिखाओ तो सही॥

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