समता की अधिकारी 'नारी'
काव्य साहित्य | कविता आशीष कुमार15 Mar 2022 (अंक: 201, द्वितीय, 2022 में प्रकाशित)
लड़ रही लड़ाई अपनी
गर्भ से ही
अस्तित्व की पहचान की
घर से लेकर बाहर तक
हर एक मुद्दे पर
ख़ुद को स्थापित किया है
अपनी मेहनत से लगन से मेधा से
खरी उतरी है हर एक औरत
हर एक पहलू—मोर्चे पर
जन्म से लेकर जन्मदिवस तक
ख़ुशियाँ फीकी हर मौक़े पर
दोयम दर्जा मिलता है इनको
अपने परिवार समाज से
प्रताड़ना झेल कर भी मान बढ़ातीं
माँ पिता कुल का
ढल जातीं हर ढाँचे में
मान मर्यादा इनके हिस्से . . .
बेलगाम है बेटों पर ख़र्चे, पर
ममता की मूर्ति बाट जोहती
ममता के अपने हिस्से की
अव्वल हैं हर क्षेत्र में
खड़ी हैं अपने पैरों पर
माँ बहन पत्नी बेटी
कोई रूप हो या कोई भूमिका
भारी है नारी हर रिश्ते पर
मानसिकता बदले समाज अपनी
जीता है आधुनिकता में
पर सोचता पुराने ढर्रे पर
समता की अधिकारी हैं वह
ढलने दे उन्हें अब अपने साँचे में
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
कविता
- 26 जनवरी अमर रहे
- अभी बादल ले रहा उबासी
- अशक्तता पर विजय
- अहा बनारस
- आईं देखीं रउवा हमार पटना
- आश्वासनों के दौर में
- ओ नभ के मँडराते बादल
- कठपुतली
- कन्या पूजन
- कस्तूरी मृग
- काश मैं भी एक गुलाब होता
- काश मैं भी एक टेडी बीयर होता
- कितना मुश्किल है पिता होना
- कुल्हाड़ी
- कोटि-कोटि नमन बिहार
- ख़ामोश सपने
- ख़ुद की तलाश
- ग़रीब आदमी हूँ
- गुरुजी पूजूँ मैं आपके चरण
- चली चली रे रेलगाड़ी
- जन्माष्टमी पर्व है आया
- जादूगर क़लम का
- ज़िन्दगी एक पतंग
- ज्वार-भाटा
- ज्वालामुखी
- तुम ही तो हो
- तेरा हर लाल सरदार बने
- तेरे रूप अनेक हैं मैया
- धरती उगल रही है आग
- नए साल की सबको शुभ मंगल बधाई
- नव वर्ष का अभिनंदन
- नव वर्ष की शुभ घड़ी आई
- पतंग की उड़ान
- पत्थर के भगवान
- पितृ पक्ष में तर्पण
- बाल हनुमान
- मन की व्यथा
- माँ-पापा की लाड़ली बेटी हूँ
- मामला गरम है
- मुक्ति संघर्ष
- मेरा कौन है मैं किसे अपना कहूँ
- मेरा मन मंदिर भी शिवाला है
- मैं फेरीवाला हूँ साहिबान
- मैं भी सांता क्लॉज़
- मैं सुहागन तेरे कारण
- रावण दहन
- समता की अधिकारी 'नारी'
- स्वागत है तुम्हारा हे नववर्ष!
- हर पड़ाव बदला रंगशाला में
- हिंदी सचमुच महान है
- हे वीणापाणि माँ सरस्वती
किशोर साहित्य कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
नज़्म
कहानी
हास्य-व्यंग्य कविता
गीत-नवगीत
कविता - हाइकु
बाल साहित्य कविता
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं