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वृद्धावस्था 

 

पति-पत्नी दोनों ही एक दूसरे के लिए चिंतित रहते थे। पता नहीं, पहले पहल आख़िरी साँस कौन ले और फिर आगे क्या होगा . . .? मृत्यु का अटल सत्य पति को भी मालूम था और पत्नी को भी। दोनों का मोह एक दूसरे के प्रति गहरा था। 

पति चाहता था की पत्नी बैंक, डाकघर, एवं एल आई सी, अन्य कार्यालयों के बारे में जाने, इंटरनेट सीखे ताकि काग़ज़ी कार्य सहजता से कर पाए, ऑनलाइन कार्य भी स्वयं ही कर पाये। और पत्नी चाहती थी कि पतिदेव स्वयं घर के कार्य सीख लें, जैसे—खाना बनाना, कपड़े धोना, साफ़-सफ़ाई आदि। 

बहुत सोचने के उपरांत एक दिन एक दूसरे ने उक्त समस्या पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया। पति ने पत्नी को साथ लेकर कार्यालयों के फ़ॉर्म आदि भरना सिखाया, स्मार्टफोन से इंटरनेट चलाना सिखाया और भी ज़रूरी कार्य सिखाये। वहीं पत्नी ने भी बीमारी का बहाना बनाकर पति महोदय से खाना बनाना व घर के अन्य कार्यों को करने की कला भी सिखा दी। अब वे दोनों निश्चिंत थे। 

वृद्धावस्था का दर्द उन्हें कमज़ोर नहीं कर रहा था। मन हल्का हो चुका था। तृप्त भाव से पति-पत्नी जीवन का आनंद लेने लगे। 

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