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साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

साथ-साथ

चलो साथ चलते हैं
दूर तलक चलते हैं। 
 
सफ़र चाहे लंबा हो
मंज़िल ऊँची ज़रूर हो
चलो साथ चलते हैं
दूर तलक चलते हैं। 
 
हाथों में हाथ हों
आँखों में आँखें हों
भाव से भरा हृदय
रूहानी जज़्बात हों
चलो साथ चलते हैं
दूर तलक चलते हैं। 
 
तुम बनो कविता मेरी
मैं तेरा शब्द चित्र बनूँ
दूर पहाड़ी में कहीं
एक कुटिया बनाते हैं
चलो साथ चलते हैं
दूर तलक चलते हैं

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