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साहब पॉज़िटिव हो गए

दफ़्तर में यह बात सुबह-सुबह कानों-कान फैल गई। 

सबकी अपनी-अपनी थ्योरी थी। सब अपने अपने फंडे और झंडे गाड़ रहे थे।

संत्री ने बताया सुबह जब साहब गाड़ी से उतरे टाई की नॉट उन्होंने ठीक की, गला बैठने की खराश में गरदन को रामदेव नुमा हरकत दिए तभी हमें लगा कुछ गड़बड़ है। वे बोले कि बैग अंदर ले आओ।

सच कहो तो आजकल इसी बात पर, संत्री होना अखर जाता है, क्या पता बैग में कौन सा वायरस लटका छिपा हो...? हमारी श्रीमती की ख़ास हिदायत है, कोई सामान सीधे-सीधे टच न किया जाय। ख़ैर,ऐसे मौक़ों के लिए हमने साहब से अपने काम की गम्भीरता जताते हुए, दो बॉटल सैनिटाइज़र अपने लिए संक्शन करा लिया है।

जब तक झाड़-फूँक मंत्र, रेकी वग़ैरा देते नहीं, या मेंटल सेनाटाइज़्ड नहीं कर लेते, ब्रीफ़केस तो क्या किसी चीज़ को हाथ नहीं लगाते। 

आज उनका ब्रीफ़केस उठाते हुए हमें करोना का अतिरिक्त भार का पता चलने लगा है। हमें न जाने क्यों लगता है ब्रीफ़केस के कुछ मैल को रिप्लेस कर करोना जर्म्स ने अपनी जगह बना ली हो। इस मनःस्तिथि में ख़ुद को पाने के लिए मैट्रिक दर्जे तक पढ़े आर्कमिडीज़ जिसे उन दिनों बाथ टब से यूरेका चिल्लाते नंगे भागने की वज़ह से झकलेट साइंटिस्ट कहते थे, बतर्ज़ उनके जब कोई पदार्थ अपने वज़न बराबर पानी हटा ले तो वह तैर जाते हैं। यही करोना कर रहा है; वो अपने अस्तित्व के बराबर मैल हटा कर ब्रीफ़केस में चिपका तैर रहा है।

सेक्युर्टी ने बताया, कि हो न हो जो ठेकेदार कल शाम को हेंड गल्ब्ज़ पहने आया था, उसी ने यह ब्रीफ़केस चिपकाया हो। साहब का पुराना वाला तो एकदम कबाड़ी में देने लायक़ हो गया था।
 ठेकेदार अपनी भड़ास निकालने के लिए  किसी किराए के कोरोना वायरस एक्टिविस्ट मरीज़ से इसे छुआ कर लाया हो और साहब को भेंट कर बदला लिया  हो।

दफ़्तर के सारे लोग मास्क के पीछे गंभीर होने का एक्स्ट्रा मुखौटा लगा बैठे थे। जिनके पास नहीं था वे भी कहीं से उधार माँग लाए थे। 

दबी जुबान में वे कह रहे थे कि 'खूसट' को चलो,  घर में क्वॉरेंटाइन करने का आदेश तो मिला।

दफ़्तर में चैन से किसी को बैठने नहीं देते थे...।

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