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रोक लो उसे

2122      2121      2122
 
कौन किसका इम्तिहान ले रहा है।
भीड़ ये मातम का  सामान ले रहा है ।
 
रोक लो उसे जानकार अक्ल-मंदों
हाथ में कोई आसमान  ले रहा है ।
 
जिस भरोसे पा सके हो जीत  हंसी
बदहवस  ये  साँस जान ले रहा है।
 
मंज़िलों की दौड़ में बनो मुक़ाबिल
वक़्त  हाथों से कमान ले रहा है ।
 
हैं क़यामत से ज़रा कि  दूर हम भी
रोज़ फ़िक्र यही इन्सान ले रहा है।
 
हो गई फ़तवे से बोलती अभी बंद
फ़ैसला जब बेज़ुबान ले रहा है।

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