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ISSN 2292-9754

वर्ष: 16, अंक 161, अगस्त प्रथम अंक, 2020

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संपादकीय

यह माध्यम असीमित भी और शाश्वत भी!
सुमन कुमार घई

प्रिय मित्रो, साहित्य कुञ्ज के प्रत्येक अंक के लिए सैंकड़ों रचनाएँ मुझे मिलती हैं। विश्वास कीजिए मैं उन सभी को पढ़ने का प्रयास करता हूँ। यह भी निश्चित है कि प्रकाशन से पहले रचना को पढ़ता हूँ, उस पर विचार करने के बाद, अगर समझता हूँ कि यह रचना निरर्थक नहीं है, और प्रबुद्ध पाठक इसे पसन्द करेंगे, तभी वह प्रकाशित करता हूँ। किसी भी रचना को प्रकाशित करते हुए यह अपेक्षा नहीं रखता कि सभी चयनित रचनाएँ, सभी पाठकों को रुचिकर लगेंगी। रचना का पसन्द और नापसन्द होना व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है। यह संपादक का कर्तव्य है कि वह हर प्रकार के उत्तम साहित्य के...

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दलित साहित्य विशेषांक

साहित्य कुंज-ई पत्रिका 'सुषम बेदी विशेषांक'; 'तेजेन्द्र शर्मा विशेषांक ' के बाद अगस्त माह के अंत में 'दलित साहित्य विशेषांक' निकाल रहा है। आप सभी से अनुरोध है कि आप दलित कौन? और दलित साहित्य क्या? दलित चेतना या दलित विमर्श; दलित साहित्य शीर्षक की आवश्यकता या अनावश्यकता आदि पर या किसी लेखक और रचना विशेष पर अपने लेख अगस्त 15 तक साहित्यकुंज की ईमेल sahityakunj@gmail.com या मेरी ईमेल:shailjasaksena@gmail.com पर भेजिएगा। इस विशेषांक में हम दलित साहित्य के इतिहास से लेकर, प्रचलित विचारों के साथ ही भविष्य में साहित्य के इस प्रकार के वर्गीकरण की सार्थकता या व्यर्थता पर भी विचार करना चाहते हैं और इस साहित्य के प्रतिष्ठित लेखकों की रचनाओं को भी पाठकों तक पहुँचाना चाहते हैं। आशा है आप का सहयोग हमें मिलेगा। सादर-शैलजा अपनी ई-मेल में अपना परिचय और फोटो अवश्य साथ भेजें। – शैलजा सक्सेना

विशेषांक

ब्रिटेन के प्रसिद्ध लेखक तेजेन्द्र शर्मा का रचना संसार

विशेषांक पर जायें
विशेषांक सूची

डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

तेजेन्द्र शर्मा बनाम हिंदी का जुनून और लेखन का अनुशासन

तेजेन्द्र जी पर यह विशेषांक निकालते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। तेजेन्द्र जी का नाम १६ कहानी-संग्रहों के लिए ही नहीं, बल्कि कविता, ग़ज़ल, अनुवाद, अंग्रेज़ी भाषा की कविताओं और कहानी लेखन, पटकथा-लेखन तथा अभिनय आदि अनेक कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। कार्यक्रमों के आयोजन, संस्था-संचालन, पत्रिका संपादन.. आगे पढ़ें

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

आभासी दुनिया का प्यार
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उस व्यक्ति के प्रोफ़ाइल में लगी तस्वीर को…

एक चींटे का फ़्लर्ट
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"कागज़ की नाव वाला कॉन्सेप्ट ही नईंच……

क्वारेंटाइन
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मूल कहानी (अँग्रेज़ी): डॉ. नंदिनी साहू …

जमा-मनफ़ी
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पपा के दफ़्तर पहुँचते-पहुँचते मुझे चार बज…

मरीचिका - 1
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(मूल रचना:  विद्याभूषण श्रीरश्मि) धारावाहिक…

मैं बैठा हूँ न
|

"हेल्लो... जी, मैं डॉक्टर सुमित राय…

लड़ाई (प्रिया देवांगन ’प्रियू’)
|

शहर की लड़की थी मीरा, उसकी शादी पास के गाँव…

हास्य/व्यंग्य

कृपया उचित दूरी बनाए रखें!
|

आरंभ में ही मैं ये बात स्पष्ट कर देना अपना…

कोरोना काल की बदलती दुनिया
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जब चीन कोरोना की आढ़त लगाये बैठा था और दुनिया…

नमः नव मठाधिपतये 
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मैंने भी कई बार न लिखते हुए भी लिखते-लिखते…

आलेख

नरनाहर आज़ाद
|

असहयोग आंदोलन के दौरान जब सत्याग्रही के…

बौद्धिक सम्पदा की धनी आरती स्मित
|

व्यक्तित्व आठ वर्ष पूर्व का वह अभूतपूर्व…

समीक्षा

कविताएँ

अगर कृष्ण ना होते 
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कृष्ण ना होते तो माखन चुराता कौन, …

अख़बार
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सुबह सुबह हर रोज़ की,  आता है अख़बार।…

आदित्य तोमर - मुक्तक - 1 नयन
|

1. रात भर जागते रहे दो नयन, सब व्यथा बाँचते…

आषाढ़  के दिन
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मन की उमस बहुत हुआ ताप बस अब तो  बरस…

इंटरनेट क्रांति
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कवि यह मोबाइल पर अटका है छोड़ दिए मंच सारे…

एक दिन मंज़िल मिल जाएगी
|

ख़ुशियों का उजाला ज़रूर होगा  बेबसी की…

एक दिया
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आज मैंने भी एक दिया जलाया, देखती रही उसे…

एक संवाद
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रोज़ी ने किया  विस्थापित।  घर के…

कजरारे बादल
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हे! कजरारे काले बादल,  मन देख तुझे…

कारगिल विजय
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सन् निन्यानवे था  थी वो माह जुलाई …

किसान की व्यथा
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मैं किसान हूँ  अब आपने अनुमान लगा ही…

कैसे पुरुष हो यार - एक
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ऐश्वर्य पर इठलाते हो।  शौर्य पर …

चाणक्य जभी पूजित होंगे  
|

जिस राष्ट्र  में बेहतर शिक्षक बन जाए…

छन्न पकैया
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छन्न पकैया छन्न पकैया, माँझी नाव चलाये।…

जानना
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मैं जानता हूँ  कि तुम बहुत समझदार हो …

डर रह गया
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आज सुबह  कल जैसे ही मिले रात में जो…

तुम (इन्दिरा वर्मा)
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तुम मेरी हर कहानी में हो, हर ज़बानी में हो,…

दिल की बात
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ऐ! वक़्त रुक तो ज़रा-सा, कुछ कहना है कहने…

नन्ही-नन्ही बूँदें
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बादल से आनेवाली हैं, नन्ही-नन्ही बूँदें।…

पाप, पुण्य
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कर्म पुण्य है। कर्म करने की क्रिया …

प्यासा कौआ प्यारा सा
|

ओ मेरे छोटे भइया नीम के पेड़ पर रहता था…

बंद दरवाज़े 
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अपने टूटे सपनों की गठरी  सिर पर लादे …

बहुत बड़ी बात हो गयी है, गाँव में भेड़िया घुस आया है
|

बहुत बड़ी बात हो गयी है गाँव में भेड़िया घुस…

बाढ़
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क्यों आती है यह बाढ़ कौन है इसका ज़िम्मेवार…

बारिश (आलोक कौशिक)
|

कल रात जब वो आई थी घर मेरे  तब होने…

बारिश की बूँदों की अनकही बातें
|

टप- टप- टप- टप करती बूँदें,  क्या करती…

बुढ़ापा
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नहीं हैं केवल बढ़ी उमर  का नाम बुढ़ापा…

भाभी से विनती
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प्यारी भाभी! एक विनती सुनोगी? रक्षा-बन्धन…

मजबूरी के हाइवे
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बातें कुछ और भी हैं ग़ौर करने के लिए सिर्फ़…

यह ज़िंदगी
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यह ज़िंदगी एक जलती हुई फुलझड़ी है बारूद का…

राजनेता
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हवा, धूप, पानी पर कब्ज़ा है इनका। धन और सत्ता…

लुढ़कती बूँदें
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स्याही आसमानों से  लुढ़कती बूँदें और…

वेदिका
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आरण्य तुम्हारे गीतांजलि पर कुछ अवशेष हमारे…

साजन बिन सावन
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हो पिया जब परदेश में  सावन भी सूखा…

साधु हो जाऊँ
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सभी दुखी है जीवन से, बस एक सुखी है साधु,…

सावन  :  चार   कुंडलियाँ
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सावन बरसा ज़ोर से, प्रमुदित हुआ किसान। लगा…

हलधर को तू प्रणाम कर
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चमक रही है श्रम से जिनके, दूर्वादल की हरी…

हार नहीं माननी है
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देखा है मैंने किरणों को आईने से टकराकर अपनी…

शायरी

मुहब्बत
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ख़ामोशियों की गूँज से सहमे लफ़्ज़ों की आवाज़…

वाल्मीकि
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(221,221,221,22) पर पीर को भी सदा है जिया…

साहित्य के रंग शैलजा के संग

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात SAHITYA KE RANG-SHAILJA KE SANG

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