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ISSN 2292-9754

वर्ष: 16, अंक 164, सितम्बर द्वितीय अंक, 2020

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संपादकीय

केवल अच्छा विचार और अच्छी अभिव्यक्ति पर्याप्त नहीं
सुमन कुमार घई

प्रिय मित्रो, सब पाठकों हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई! इस बार हिन्दी दिवस का उत्सव भी आभासी दुनिया में ही मन रहा है – परन्तु शुक्ल पक्ष है कि यह उत्सव स्थानीय न होकर वैश्विक हो गया है। है न अजीब बात, एक आपदा ने दुनिया छोटी कर दी। यह सुविधाएँ पहले से थीं परन्तु आम व्यक्ति न तो इनके बारे में जानता था और अगर जानता था तो इनका प्रयोग करना नहीं चाहता था। आभासी दुनिया में बस एक बात खटकती है कि वह तालियों की गूँज और वाह-वाह का आभास, मात्र ताली बजाते इमोजी तक रह गया है। नई वास्तविकता है, नए समझौते हैं और नए...

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net

विशेषांक

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विशेषांक सूची

डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

साहित्य संरक्षण देता है, वह मनुष्य की चेतना और उसके विवेक को, उसके मानवीय मूल्यों को संरक्षित करता है। इसी से युगों पहले लिखा गया साहित्य भी प्रासंगिक हो जाता है। जब-जब मूल्यों का हनन होता है तब उन मूल्यों के हननकर्ताओं पर साहित्य अपने आक्रोश की तलवार तानता है, अपने साहस की दीवार पर खड़ा होकर उन्हें.. आगे पढ़ें

(विशेषांक सह-संपादक)

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

जंगली धारा
|

मूल अँग्रेज़ी : डॉ नंदिनी साहू  अनुवाद…

डर (सतीश सिंह)
|

संजय यानी मैं सालों से मुंबई में हूँ। भागम-भाग…

दर्द जब हद से गुज़र जाए
|

फाल्गुनी अपने पति मेहर महाजन के साथ यूरोप…

बापवाली!
|

“बाहर दो पुलिस कांस्टेबल आए हैं,”…

मरीचिका - 4
|

(मूल रचना:  विद्याभूषण श्रीरश्मि) धारावाहिक…

शिक्षक सम्मान
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"नहीं, तुम्हें शिक्षक सम्मान नहीं मिल…

सलीना तो सिर्फ़ शादी करना चाहती थी
|

सुबकियों के बीच निराश सलीना ने बोखारी के…

सुकून! (आरती ’पाखी’)
|

रात के क़रीब दस बजने को थे। आज मौसम ने अचानक…

हास्य/व्यंग्य

आता माझी सटकली
|

फाइनेंस कंपनी के चेयरमैन को पत्र आदरणीय, …

चरणयोगी भोग्या वसुंधरा
|

कहता रहे जो कहता रहे, हो जिसके लिए कर्मयोग…

विराम- अविराम
|

मेरे कंप्यूटर का हिन्दीवाला कुंजी-पटल विराम-चिह्न…

आलेख

समीक्षा

उम्मीदों के ऊर्जावान कवि : श्री दुर्गा प्रसाद झाला
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'जलती रेत पर नंगे पाँव' यह कविता संग्रह श्री दुर्गा प्रसाद झाला…

एक उपन्यास जिसे आपको पढ़ना ही चाहिए
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चर्चित कृति: स्वर्ग का अंतिम उतार (उपन्यास)  लेखक: लक्ष्मी शर्मा …

रोचक व्यंग्य रचनाओं का अनूठा गुलदस्ता
|

पुस्तकः बंटी, बबली और बाबूजी का बटुआ (व्यंग्य संग्रह) लेखकः श्री दीपक…

संस्मरण

चाऊमाऊ की कहानी मेरी ज़बानी
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आज जो कहानी मैं आप लोगों को सुनाने जा रही…

कविताएँ

आत्मनिर्भर
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क्या कहा साहेब! अब हम आत्मनिर्भर बनेंगे?…

कोरोना का क़हर
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आज तक  ऐसी बीमारी न देखी  जिसने…

कोरोना में मौत
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दूर क्षितिज तक सन्नाटा था सिर्फ़ प्रकृति…

कौन हो तुम
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कैसे बताऊँ  तुम कौन हो मेरे लीए। कैसे…

छत पर कपड़े सुखा रही हूँ
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चार दिनों से इन्द्रदेव की बरस रही थीं रोज़…

छन्न पकैया : कोरोना
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छन्न पकैया छन्न पकैया, आया है कोरोना बच्चे…

जिजीविषा
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हम जीते हैं  अपनों के लिए  अपने…

जी सही फ़रमाया आपने
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औरतों को चूड़ियाँ बहुत भाती हैं। बड़े शौक़…

तीन लोग
|

तीन लोग  संसद के बाहर  प्रदर्शन…

देख अब सरकार में
|

ज़मीर मेरा कहता जो करता रहा था तब तक, मिल…

देश भक्तों को नमन
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नमन उन्हें जो आज़ादी, लाने में क़ुर्बान हुए।…

प्यार के गीत गाते रहो
|

प्यार के गीत गाते रहो तुम सदा यूँ ही मुस्कुराते…

प्रेम (रजत रानी मीनू)
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वह उससे करता था प्यार की बातें प्रेम तो…

प्रेम परिधि
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बिंदु और रेखा में परस्पर आकर्षण हुआ …

बंधन
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(ताटंक छंद)   जनम जनम का बंधन है ये,…

बूढ़ा चशमा
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बूढ़ा चशमा, ढूँढ़ रहा है, तले समोसे में, इस…

बैरन निन्दिया
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बेचैन है क्यों  पता नहीं? दिल को पर …

भीड़
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भीड़ है यह किसी को नहीं देखती सिर्फ़ होती…

मंज़ूर...
|

    तुझे हद से ज़्यादा    …

मन का अपना दर्पण
|

वह शीशा जिसमें हम स्वयं को देखते हैं स्वयं…

मेरा गाँव
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मेरे मन में बसा है मेरा गाँव मुझे आदत है…

मैं और मेरी चाय
|

मैं और मेरी चाय – चलो चाय बनायें …

राष्ट्रभाषा पर बहस चले!
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हिन्दी दिवस (14 सितम्बर 2020) पर विशेष नमस्कार!…

सँवारना
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हम कितना कुछ  सँवारना चाहती हैं …

संबोधन पद!
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शब्दों को संबोधित करता है, संबोधन पद!  …

स्कॉटलैंड में बादल : कुछ चित्र 
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(1) अलसाये- निंदाये बादल  हरी पहाड़ियों…

स्त्री जीवन का गणित
|

स्त्री जीवन का गणित क्या समझेंगे वे जो करते…

स्वच्छता अभियान
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चल पड़ी है टोली आज, नया कर दिखाने को। छोटे…

हम भारत के सैनिक
|

हम भारत के सैनिक हैं यह, देश हमें अति प्यारा…

हर एक घर कुछ कहानी कहता है
|

हर एक घर कुछ कहानी कहता है कुछ यादें सिमटी…

शायरी

साहित्य के रंग शैलजा के संग

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात SAHITYA KE RANG-SHAILJA KE SANG

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