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ISSN 2292-9754

पूर्व समीक्षित
वर्ष: 16, अंक 185, जुलाई द्वितीय अंक, 2021

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संपादकीय

लेखक की स्वतन्त्रता
सुमन कुमार घई

प्रायः कहा जाता है कि लेखक मूलतः स्वतन्त्र प्राणी है। वैसे यह कहा तो हर विधा के कलाकार के विषय में जाता है परन्तु लेखक छाती ठोक कर इसका सदियों से दम भरते आए हैं। क्या यह निर्विवादित सत्य है? क्या यह स्वतन्त्रता वास्तव में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है? अगर यह स्वतन्त्रता है तो इसके कोई मापदण्ड हैं, अगर हैं तो क्या हैं? इसकी सीमा क्या है? क्या स्वतन्त्रता की भी सीमा होती है? अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अर्थ एक व्यक्ति या व्यक्तियों के अपने विचारों, विश्वासों और विभिन्न मुद्दों के बारे में अपने विचारों को प्रशासन के प्रतिबंधों और नियन्त्रण के बिना, व्यक्त करने की स्वतन्त्रता है।...

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net

विशेषांक

वर्ष 2020 कोरोना संकट के संदर्भ से बदलता जीवन

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विशेषांक सूची

डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

अपने अपने रास्ते
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गाँव में बग़ैर मर्द के अकेले रहना क्या होता…

अम्मा स्कूल खुलने वाली है
|

दिनभर सूर्य अपनी रोद्ररूप में विशाल धरती…

उद्धार/लोग क्या कहेंगे
|

विवाह योग्य लड़के के लिए माता-पिता लड़की…

कलर ऑफ़ हैप्पीनेस
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ज़िन्दगी में कुछ भी पुख़्ता नहीं होता, ख़ुद…

छोटे लोग
|

किसन ने अपनी धुली-धुलाई  चमचमाती रिक्शा…

जुगनू
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दो-तीन दिन की बारिश के बाद पेड़ों में मानो…

तहज़ीब का मसला
|

एक पाकिस्तानी धारावाहिक में साक्षात्कार…

तीन-तेरह
|

"हर्षा देवी नहीं रहीं," कस्बापुर…

धूप और बारिश
|

पंद्रह दिन पहले पति की मृत्यु हो गई थी।…

पौधरोपण
|

"हाँ तो मिस्टर शर्मा तैयारी पूरी हो…

मासिक चक्र
|

"प्रिया वहीं रुको!" एक तीखी आवाज़…

मोटा दाढ़ी वाला
|

वह साँवली सी बमुश्किल पंद्रह-सोलह वर्ष की…

रस्म
|

"मम्मा चलो न देखो सुप्रिया के चाचाजी…

राग-विराग – 015
|

"भौजी, भौजी हो . . . कहाँ गईं? . .…

शहरी लड़के
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जैसा कुछ दिन पहले मेरे  मित्र चकोर…

सत्कर्म का फल
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एक दिन अंबर नाम का ग्वाला सुबह दूध लेकर,…

सदा सुखी रहो बेटा 
|

रिटायर्ड इनकम टैक्स ऑफ़िसर कृष्ण नारायण पांडे…

सौ रुपए की सब्ज़ी
|

बूढ़े माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण…

हास्य/व्यंग्य

कार क्रय यज्ञ
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हुआ यूँ कि जब जानकी दास जी ने अपनी कई वर्षों…

नयी ’कोरोनाखड़ी’
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कहते हैं कि एक व्यक्ति को अपनी रुचि के व्यवसाय…

ब्लैक मार्किटियों की गूगल मीट 
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जैसे ही अखिल भारतीय ब्लैक मार्किट महासंघ…

क़िस्से जाहिलिस्तान के
|

उर्दू व्यंग्य  मूल रचना: कन्हय्या लाल…

आलेख

अपना अपना स्वर्ग
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क्या आपका भी स्वर्ग औरों के स्वर्ग से बिल्कुल…

चिंता नहीं, चिंतन का विषय
|

कुछ पाठकों को मेरी बात शायद अटपटी लगे, लेकिन…

वह सातवीं ऋतु
|

आधिकारिक तौर पर भारतवर्ष में छह ऋतुएँ होती…

समीक्षा

संस्मरण

आर. बी. भण्डारकर – डायरी 008 – जीत का अहसास
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दिनांक 04 जुलाई 2021 आज रविवार है; तदनुसार…

उदीयमान सूरज का देश : जापान 
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नोट- सुधि पाठक इस यात्रा संस्मरण को पढ़ते…

छोटी-छोटी बातें
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ग्रामीण समाज में नन्हें-बच्चों को घेर कर…

जीवन में घटनाओं से सीख
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जीवन में कभी-कभी ऐसी घटनायें घटित होती हैं…

तेरे लिए तो सबसे बड़ा कमरा
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समय के रथ पर सवार जीवन जब यात्रा पर निकल…

बचपन की दोस्त – मेरी गुलाबो
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मैं और गुलाबो उर्फ़ पूजा बचपन की सहेलियाँ…

साक्षात्कार

कविताएँ

अटल आकाश
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आओ प्रिय, कुछ पल बैठें, इस शीतल वट की छाया, …

अधूरापन
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कहानी मेरी वही अधूरी सी,       …

अब दूरियाँ सब हों दहन
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भीगती बूँदों से आँखें तेज़ चलती अनगिनी धड़कन…

अब राह नहीं छोड़ूँगा
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अब राह मिली  सूरज बरसाए निज अग्नि,…

अवसर कितने? 
|

(दोहा-गीत)   तुझसे मिलती है हमें, …

आओ ना बरसात
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(मनहरण घनाक्षरी में रचना)   वर्षा काल…

एक अलौकिक प्रेम कहानी
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एक थी लड़की नाम चंदना, एक था लड़का नाम जगत…

क़हर
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ये किसकी नयना यूँ झड़ी पत्थर को मोम जो कर…

काल की ये विवेचना 
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है ये कैसा सघन अँधेरा लीलने को आतुर बहुत…

किस मोड़ पर आँसू आए हैं
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किस मोड़ पर आँसू आए हैं लोग जो अपने हुए…

कोरोना से दिवंगतों को श्रद्धांजलि
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श्रद्धा की अंजलि अर्पित है, जो असमय जग से…

क्या होता?
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क्या होता? कभी यूँ ही बैठे-बैठे मैं सोचती…

चिड़िया
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चिड़िया चहचहाती है, नन्हे को उड़ना सिखाती…

छाँव
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छाँव सुकून देती है। माँ के आँचल की छाँव …

जहाँ प्रेम है वहीं जीवन है
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तुम्हारे लिए सिर्फ़ बँधना प्रेम है मेरे लिए…

जीना इसी का नाम है
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घने कोहरे को चीरता देखा जो उगता सूरज बात…

जीवन की बाधाएँ
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यह जीवन है जल की धारा बाधाएँ शिलाखंड सी…

टमाटरों की हड़ताल
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अनिश्चितकाल के लिये हुई 'टमाटरों की…

दर्पण
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दीवारों में लगे, लकड़पट्ट में जड़े तुम में…

दुष्ट करोना तुझे तो मरना होगा
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जबसे सुबह हुई है मेरी दबा रहा हूँ मेवा पत्नी…

पागल लड़की
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तुम चीज़ों को ढूँढ़ने के लिए रोशनी का इस्तेमाल…

प्रेम
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प्रेम आत्मा का प्रकाश है जिसकी ज्योति-गंगा…

बुधिआ को सुई
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अभी तोड़ कर लाया हूँ खेत की मेढ़ से लाया…

बुरे निकले हो तुम तो यार
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कुटिल करोना बहुत बुरे निकले हो तुम तो यार…

बेटियाँ
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कई बार लोगों को मैंने कहते सुना है की वो…

भविष्य की नाहक़ चिन्ता
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ज़्यादातर पुरानी पीढ़ी का है यह सोचना कि…

मतदान
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चुनाव आते है  नौकरशाही से लबरेज़ …

मार्गदर्शक कबीर
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एक ही राह अपनाने को  ज़माने भर के दर्द…

मेरा घर
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आज ऑफ़िस में काम के सिलसिले में मेरा मन उचटा…

मैं क्यों अपनी पतवार तजूँ?
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एक दो विजयों में क्या हर्ष करूँ,  किंचित…

मैं मिलूँगा तुम्हें
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सुनो! घबराना मत तुम घर की इन दीवारों में…

मौन बहुत है
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मौन बहुत है, कुछ तो बोलो। माना कि तुम व्यस्त…

ये चाँद
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ये जो चाँद है तुमसे जलता है इसलिए चुपचाप…

ये समय की कैसी आहट है! 
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ये समय की कैसी आहट है, हर ओर बस घबराहट है।…

रावण-दहन
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रावण-दहन कर लोग जब मुस्काए, स्वर्ग में बैठे…

लक्ष्मी बाई
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मणिकर्णिका बन लक्ष्मीबाई पग धरणि पर धर दिया।…

विज्ञानकु: जेम्स वाटसन 
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ईश्वर संग सिर्फ़ खेलेंगे हम जान लो तुम।  …

विज्ञानकु: सर सी वी रामन
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स्वतंत्र सोच विज्ञान का आधार मेरा विचार।…

विज्ञानकु: होमी भाभा
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लंबी न सही ज़िंदगी हो सार्थक लक्ष्य हो यही।…

विवेक
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हरता क्रोध विवेक को, देता नाना कष्ट। क्षीण…

शक्कर के दाने
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जब भी संतृप्त अपरिहार्य और व्यस्त ज़िंदगी…

शांति दूत बने जब भगवान!
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शांति दूत बने जब भगवान, द्रौपदी को याद आया…

शाश्वत हो हमारा गणतन्त्र दिवस
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शाश्वत हो हमारा गणतन्त्र दिवस। हमें रहे…

समानांतर रेखाएँ
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मुझे पसंद हैं समानांतर रेखाएँ दो रेखाएँ…

सुनो स्त्री . . .
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छुपाती हो जब तुम अपनी झूठी मुस्कराहट के…

सूरज से पी है मैंने आग
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सूरज से पी है मैंने आग पूरी करनी है रोज़…

हमसफ़र
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राह काटों भरी है मेरे हमसफ़र, है डगर थोड़ी…

हे शिव, तुम ही कहो
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मैं मसान में बैठा निज शव साध रहा हूँ बिखरी…

क़ुदरत की चिट्ठी 
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हे! इंसान हे महामानव! तुम्हें एक बात कहनी…

शायरी

आज़माना ठीक नहीं
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दोस्ती में दोस्तों को आज़माना ठीक नहीं  …

लाशों का शहर बन बैठा है, आज हर एक शहर
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लाशों का शहर बन बैठा है, आज हर एक शहर। बहते…

लेखिका: डॉ. आरती स्मित

डॉ. नरेंद्र मोहन के स्वर में कविताएँ

डॉ. नरेंद्र मोहन के स्वर में कविताएँ: पेंटिंग में कविता; बच्चो सोचो ज़रा; काव्य संकलन: मायने होने के…

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