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ISSN 2292-9754

वर्ष: 15, अंक 160, जुलाई द्वितीय अंक, 2020

पुस्तक बाज़ार

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संपादकीय

पहले मुर्गी या अण्डा?
सुमन कुमार घई

आजकल करोना काल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आभासी दुनिया में बहुत सी संगोष्ठियाँ, चर्चाएँ, वेबिनार हो रहे हैं। इस भयानक आपदा का एक सकारात्मक पक्ष है। अगर कवि गोष्ठियों को छोड़ दें और केवल वैचारिक मंचों पर हो रही चर्चाओं का विश्लेषण करें, तो एक तथ्य उभर कर सामने आ रहा है कि हिन्दी भाषा के भविष्य के प्रति सभी किसी न किसी सीमा तक चिंतित हैं। मेरे लिए यह कोई नया विषय नहीं है। वर्षों से मैं इस समस्या को देख और भुगत रहा हूँ; इससे निपट भी रहा हूँ। वैश्विक हिन्दी परिवार (व्हाट्सएप ग्रुप) ने कई समूहों को संगठित किया है जो हिन्दी भाषा के विभिन्न...

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दलित चेतना विशेषांक

आगामी दलित चेतना विशेषांक के लिए आपके लेख, कहानियाँ और कविताएँ आमंत्रित हैं। अपनी मौलिक रचनाएँ जुलाई 30, 2020 तक साहित्यकुंज के ईमेल पर भेजिये। अपनी ई-मेल में अपना परिचय और फोटो अवश्य साथ भेजें। sahityakunj@gmail.com

विशेषांक

ब्रिटेन के प्रसिद्ध लेखक तेजेन्द्र शर्मा का रचना संसार

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विशेषांक सूची

डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

तेजेन्द्र शर्मा बनाम हिंदी का जुनून और लेखन का अनुशासन

तेजेन्द्र जी पर यह विशेषांक निकालते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। तेजेन्द्र जी का नाम १६ कहानी-संग्रहों के लिए ही नहीं, बल्कि कविता, ग़ज़ल, अनुवाद, अंग्रेज़ी भाषा की कविताओं और कहानी लेखन, पटकथा-लेखन तथा अभिनय आदि अनेक कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। कार्यक्रमों के आयोजन, संस्था-संचालन, पत्रिका संपादन.. आगे पढ़ें

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

कितने दूर कितने पास
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सुधा सुबह के नाश्‍ते के लिए किचन में…

निश्छल प्रेम
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उन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा देने गाँव…

पुरानी फाँक
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सुबह मेरी नींद एक नये नज़ारे ने तोड़ी है... …

सपनों का राजकुमार
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सुरभि कुछ ख़्यालों में डूबी हुई, अपने घर…

सीमेंट की पुतली
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(सिंध की कहानी ) मूल लेखिका: रशीदा हिजाब…

हास्य/व्यंग्य

आत्म चिंतन का दौर
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गनपत कई दिनों से पीछे पड़ा था, "गुरुदेव…

चीनी कम
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कुछ समय पहले टीवी पर एक इश्तहार आता था जिसमें…

पहली बार मज़े 
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मुझे सामूहिक लाभों से कभी कोई सरोकार नहीं…

आलेख

संस्मरण

धर्मशाला का उपनगर मैक्लोडगंज और धर्मकोट
|

कभी पंजाब बड़े क्षेत्रफल का बृहद प्रदेश था।…

ख़ुशी के आँसू
|

 बात उन दिनों की है, जब मेरा चयन बतौर…

कविताएँ

अब ना सखी मोहे सावन सुहाए
|

  अब ना सखी मोहे सावन सुहाए अब ना सखी…

आँगन के पाथर
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पैर जैसे ही पड़े आँगन में बरसों बाद एक एक…

इन छुट्टियों में माँ
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माँ तुम घर पर ही रहना तभी तो तुमसे मिल पाऊँगी…

इस रास्ते से देश अपने घर लौट रहा है
|

इस रास्ते से पसीने में लिपटा हुआ गुलाब जा…

इस व्यवस्था की ऐसी की तैसी
|

वह चुपचाप चली जा रही है राष्ट्रीय राजमार्ग…

ऐसे न काटो यार
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दरख़्तों के साये  हमारा घर, दर और दीवार। …

काल
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मैं तूफ़ानों से निकला हूँ मुझे आँधियों से …

कुछ भी असम्भव नहीं
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तुम चाहो तो सब सम्भव है,  उज्जवल होगा…

कृष्ण
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 (दोहा) माखन मुख लिपटा हुआ, मैया पकड़े…

कोरोना का रोना 
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ताल किनारे महुआ महकी कूप किनारे चम्पा गमकी…

खेल
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उसे हँसने की आदत थी, थी आदत मुस्कुराने की,…

खो गया कहीं
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खो गया कहीं, वक़्त  दो पलों  का…

गुरु के नाम
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छद्मवेशी संसार में असंख्य कल्पों से तुमको…

गुहार
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हे चंद्रचूड़ , हे भूतनाथ, हे मृग छाल धारी। …

गुड़िया रानी
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(सार छंद) छमछम करती गुड़िया रानी, खेले छपछप…

दिलासा
|

माँ, उम्मीद ना टूटने देना तेरे आँचल में…

पर्यावरण बचाओ
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(दोहा छंद) पेड़ लगाओ मिल सभी,  देते…

प्रजातन्त्र जारी है
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बहस जारी रहे।  प्रजातन्त्र जारी है। …

प्राइवेट टीचर की दास्तां-१
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काश मैं मंदिर का पुजारी होता छोटा-सा ही…

प्राकृतिक आपदाएँ
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प्राकृतिक आपदाएँ दो तरह से नुक़सान पहुँचाती…

बरखा रानी आई है
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(ताटंक छंद) गड़गड़ गरजे आसमान से,  घोर…

बे मौसम बरसात
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जाने क्या शोक था, जाने क्या शौक़ था , जाने…

बेवफ़ा
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(दोहा छंद) क़समें वादे तोड़ कर, हुई बेवफ़ा…

भोर भई अब बासी रे!
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सुन! साधु औघड़ संन्यासी  मोह माया मुक्त…

मेरी बिटिया
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प्रकृति का उपहार है बिटिया युगों युगों का…

मैं भी इंसान हूँ
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मैं भी तुम जैसा इंसान हूँ, मुसीबतों से परेशान…

ये तो कहा ही नहीं  
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अभी घंटा भर पहले ही तो बॉर्डर से आई लव यू…

राजकोष है खुला हुआ
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राजकोष है खुला हुआ  पर लोग पलायन को…

रोम रोम में शिव हैं जिनके 
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रोम रोम में शिव हैं जिनके, विष वही पिया…

वीरों का ले अरि से हिसाब
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वीरों का ले अरि से हिसाब। चीनी शोणित से…

शैतानी दिमाग़ के विपक्ष में खड़ा हूँ
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मैं ख़ुश रहना चाहता हूँ मैं हवा से बहुत नाराज़…

सवाल (नासिर अख़्तर इंदौरी)
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बस एक सवाल है मेरा, जवाब दोगे? और दे पाओगे…

सावन (आलोक कौशिक)
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पिपासा तृप्त करने प्यासी धरा की  बादल…

सावन (निलेश जोशी 'विनायका')
|

आज रात जब सावन बरसा  भीगी धरती तन मन…

सुरंगमा यादव हाइकु - 4
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1. प्रेम फुहार धरा पर बरसा नभ का प्यार 2.…

ख़्वाहिश
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थी उसकी ख़्वाहिश  मैं मर जाऊँ और मेरी…

ज़िंदगी के रंग
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हज़ारों नहीं लाखों नहीं  करोड़ों भी…

शायरी

इस बार की बारिश
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अलग एहसास दे कर जाएगी इस बार की बारिश सुनो…

खिड़की 
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मेरे ऑफ़िस की खिड़की से  नज़र आता है इक…

तब और अब 
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वक़्त था जब हर बशर मानता था कि यह शिकार व…

यक़ीं जिसको ख़ुदा पर है कभी दुख में नहीं रोता
|

यक़ीं जिसको ख़ुदा पर है कभी दुख में नहीं रोता…

रुत बहारों की सुहानी चाहिए
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रुत बहारों की सुहानी चाहिए  चाँद तारे…

साहित्य के रंग शैलजा के संग

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात SAHITYA KE RANG-SHAILJA KE SANG

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