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सम्पादकीय

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ISSN 2292-9754

पूर्व समीक्षित
वर्ष: 17, अंक 189, सितम्बर द्वितीय अंक, 2021

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संपादकीय

हिन्दी दिवस पर मेरी चिंताएँ
सुमन कुमार घई

साहित्य कुञ्ज के सभी पाठकों, लेखकों व सहयोगियों को हिन्दी दिवस की बधाई! जब तक भारत में पाठक साहित्य कुञ्ज के नए अंक को देखेंगे, पढ़ेंगे हिन्दी दिवस–२०२१ बीत चुका होगा। वैसे देखा जाए तो हिन्दी साहित्य के प्रेमियों के लिए तो प्रतिदिन हिन्दी दिवस है; फिर भी, कोई भी उत्सव मनाना सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और यही उत्सवों का महत्व होता है। प्रायः ऐसे अवसरों पर संस्थाएँ और हिन्दी प्रेमी व्यक्तिगत स्तर पर कई बार संकल्प लेते हैं कि आने वाले वर्ष में वह हिन्दी को किस तरह आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। यह भी सराहनीय है।  विश्व के इस कोने में बैठे हम हिन्दी-प्रेमी...

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net

विशेषांक

कैनेडा का हिंदी साहित्य

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डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

अपनी-अपनी विवशता
|

विधवा बूढ़ी काकी गाँव के खंडहर घर में अकेली…

एक्टर की मौत – हत्या या आत्महत्या
|

सुबह के आठ बजे बज रहे थे। गणेश भोजनालय में…

कुनबेवाला
|

(१) “ये दीये गिन तो।” मेरे माथे…

गंदी लड़की
|

"ऑफ़िस के साफ़-सफ़ाई के काम के लिए मुझे…

छोटकी और मोटा हाथी
|

चींटियों का झुंड भोजन की तलाश में निकला…

टॉमी और बंदर
|

बच्चों आज तुम्हें टॉमी और बंदरों की मनोरंजक…

तीन कुँवारियाँ
|

मूल कहानी: द थ्री क्रोन्स; चयन एवं पुनर्कथन:…

नक़ाबपोश रिश्ते
|

दिव्या गाँव में रहने वाली एक भोली-भाली सी…

प्रेम प्यासा
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लाल जोड़े में सजी-सँवरी बैठी कल्पना, कल्पना…

भाँड
|

वह अपने पिता जी की  वीर रस की कविताओं…

विडम्बना
|

"सुना है - चाँद पर पानी खोज रहा है…

विसर्जन
|

शाम के 7 बजकर 40 मिनट हो रहे थे। स्निग्धा…

सम्मान
|

पति के चेहरे पर निराशा के भाव देखकर पत्नी…

सुबह अभी हुई नहीं थी 
|

सुबह अभी हुई नहीं थी। सूरज निकलने में अभी…

सेकेण्ड वाइफ़ – 1
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नवंबर का दूसरा सप्ताह बस जाने ही वाला था।…

स्वागत
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ताऊ भरथु जवानी से ही ऐसे दल का समर्थन करते…

हरतालिका-तीज
|

“अच्छा-ख़ासा मूड था आपका, यूँ अकस्मात…

हसरतों का ख़ून
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लेखक: रिज़वान गुल सिंधी से हिन्दी में अनुवाद:…

हास्य/व्यंग्य

आश्वासन मय सब जग जानी
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इधर ज्यों ही साँपों की नज़र अख़बार में छपी…

बार्टर सिस्टम
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बरसों पहले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने एक…

आलेख

जैन धर्म और पर्यूषण पर्व
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जैन धर्म को हिंदू समाज का ही अंग माना जाता…

मेरा शहर बनारस
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करोना काल के कारावास के बाद कृष्ण जन्माष्टमी…

समीक्षा

आम आदमी के पक्ष में खड़ी कविताएँ
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आलोच्य पुस्तक: नई रोपणी (कविता संग्रह) लेखक: सुरेश उपाध्याय  प्रकाशक:…

रामनारायण रमण कृत ‘जोर लगाके हइया’
|

समीक्ष्य पुस्तक: जोर लगाके हइया लेखक: रामनारायण रमण प्रकाशक: जयपुर : बोधि…

संवाद यात्रा : कुछ अनछुए पहलू
|

पुस्तक का नाम: संवाद यात्रा लेखक: प्रो. चंदन कुमार प्रकाशक: संचय प्रकाशन,…

स्त्रियाँ घर लौटती हैं
|

पुस्तक: स्त्रियाँ घर लौटती हैं (काव्य संग्रह) लेखक: विवेक चतुर्वेदी…

साक्षात्कार

कविताएँ

अनबुझी प्यास
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लबों की अनबुझी प्यास सुन कर, चली आई हूँ…

आँखों में छुपा रखा है
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पतझड़ के मौसम में  बहारों को सजा रखा…

आओ, पर्यावरण बचाएँ
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सूरज ने जब आँख दिखाई। लगी झुलसने धरती माई॥…

आज का भाव
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आलू पचास का तीन किलो सौ रुपये में तीन किलो…

आदमी और इंसान  
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आदमियों के बीच खोजती हूँ इंसानों को, पास…

आधा  हाँगकाँग 
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मूल कवि: युआन तियान अंग्रेज़ी अनुवाद: जॉर्डन…

आह्वान
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जागो उत्साहित योद्धाओं, तमस की आँखें मंद…

आज़ादी
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आज़ादी? आज़ादी कैसे आज़ादी? विस्मृतियों का…

उड़ान
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खुले में आ गए हो, उड़ना भी सीखो, उड़ने दो,…

ऐ ज़िंदगी थोड़ी ठहर जा!
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ऐ ज़िंदगी थोड़ी ठहर जा, तेरी रफ़्तार से घबराने…

कृष्ण जन्म- सत्य एवं न्याय
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अर्ध निशा मे मिली दिशा कारागृह में जन्मी…

क्षमा भाव
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जब क्षमा भाव गहराता है मन करुणामय हो जाता…

गाँधी को हक़ दे दो
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अब गाँधी को– आओ, उसका हक़ दे दो। …

चूड़ियाँ
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हाथों में खनकती हैं जब-जब,  संगीत की…

छतों पर शाम बिताना
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छतों पर जो शामें बीतीं  कहानी कहतीं…

जाने क्यूँ?
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मेरे अंदर का कवि  दिन में सोता, रात…

जीवन की शाम
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ना जाने कब हो जाए इस जीवन की शाम, भाग रहा…

जीवन संध्या की बेला है
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दिन इक इक करके उड़ चले हाथों में बची कुछ…

जो बीत गए वो दिन भी अच्छे थे
|

जो बीत गए वो दिन भी अच्छे थे जो साथ रहे…

ज्ञान जो अमृत है
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ज्ञान जो अमृत है जिसे स्वर्ण कलश में नहीं …

दर्द का लम्हा
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दर्द  जब साँसों के गलियारे से …

दवा
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काश, कोई दवा  या हो कोई ऐसी दुआ पा…

धरित्री
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धान्यागार है वो धरित्री सुरम्य कर उसे ये…

नम हो चुकी हैं आँखें
|

नम हो चुकी हैं आँखें तुम्हारी बातें करते-करते,…

नशा
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धीरे-धीरे बना ज़हर,  मानव को डसता जाता…

पंछियों से भरा द्वार
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चिड़ियों के कलरव से गूँजता है मेरा द्वार,…

पायल छनकाती बेटियाँ
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पायल छनकाती बेटियाँ मधुर संगीत सुनाती बेटियाँ…

फिर से
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तुमको जीवन की मर्यादा के लिए उठना होगा।…

बना रही लोई
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चलती बारिश में बादल ने बूँद पिरोई। तरुणी…

बिटिया में मेरी साँसें बसती
|

बेटी अब घुटने चलने लगी सँभलती वो अब धीरे-धीरे …

बुद्धिमान कौआ
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(राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी जी को सादर…

भूमि पुत्र
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जिस मिट्टी में जन्म लिया  उस मिट्टी…

मक्कारों की सूची
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गाँव में बड़ी-बड़ी मक्कारियों को अंजाम दे…

मरी हुई साँसें – 002 
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1. तुम्हें महसूस ना करने के लिए मैं भले…

माटी का तिलक
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कभी माटी का तिलक , भाल पर करना चाहिए, …

मैं
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मैं . . . एक सूखे हुए पेड़ की टूटी हुई डाली…

मैसेज और हिन्दी का महल 
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स्वतंत्रता की ७५ वाँ वर्ष गाँठ पर बधाई,…

यह कैसा जीवन है?
|

सपनों का संग था, जीवन में रंग था, छाई कैसी…

ये आँखें
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अधखुली आहों से झाँकता सूना भविष्य, जिसको…

रास्ता
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रास्ता बुलाता है, राहगीरों को  कोई…

लॉकडाउन में
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सन्नाटा पसरा हर गली, हर कूचे और हर नुक्कड़…

विज्ञानकु: शोध हमारे
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शोध के नाम याद रहे करेंगे ढंग के काम।  …

विज्ञानकु: शोधार्थियों से
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रहे ये ध्यान अग्रणी क्षेत्रों में हो अनुसंधान।…

शिक्षक
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नव आदर्श स्थापित करने बचपन कई सँवारता शिक्षक…

शिक्षक
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हाँ मैं एक शिक्षक हूँ। शिक्षक होने का दंभ…

शिक्षक
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(विधा सेदोका) 1. राष्ट्र निर्माता शारदा…

शिक्षक तो अनमोल है
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नूर तिमिर को जो करें, बाँटे सच्चा ज्ञान!…

शिक्षक ही पंख लगाते हैं
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तम-तोम मिटाते हैं जग का, शिक्षक धरती के…

शोभा श्रीवास्तव मुक्तक - 004
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(संदर्भ: हिन्दी दिवस) 1. जिस भाषा में पहली…

संजा (साँझी)
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साँझी का देशज शब्द संजा है।   गाँवों…

सच्चाई से पलायन
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बदल देता हूँ जल्दी से न्यूज़ चैनल या 'स्क्रोल'…

सत्य के पथ पर
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सत्य के पथ पर चलोगे तो सामना संघर्षों से,…

हाड़ी रानी!
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रण शोणित पी हो मतवाले, जहाँ वीर रण खेत उगे।…

हिंदी की बात
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हिंदी की बात करें इस महीने वे दिन रात।  …

हिंदी दिवस मनाने का भाव
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हिंदी दिवस मनाने का भाव अपनी जड़ों को सींचने…

हिंदी बोलो रे
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हिंद के निवासी हो तो हिंदी बोलो रे प्रेम…

हिंदी मेरी भाषा
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प्यारी-प्यारी सबसे न्यारी मेरी भाषा। हिंदी…

हो गए केवट के श्रीराम
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केवट को बुलाकर बोले श्रीराम, गंगा पार करो…

होली के रंग में
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उन्मुक्त गगन में विस्तृत विशाल बहुरंग, उड़ते…

ॐकार बनना चाहता हूँ
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ब्रह्मांड का अणु अणु है रहता अनवरत एक वृत्त-परिधि…

क़ब्र
|

मूल कवि: युआन तियान अंग्रेज़ी अनुवाद: डेनिस…

शायरी

अब के बहार आए ज़माना गुज़र गया
|

अब के बहार आए ज़माना गुज़र गया  दिल…

इलाही! चल  बता सबको  ज़रा
|

इलाही1! चल  बता सबको  ज़रा,  यह…

मेरे ख़ुदा
|

मैं फ़क़ीर हूँ, तेरे दर का ख़ुदा मेरी आज़माइश…

लेखक: अमिताभ वर्मा

सज़ा (अमिताभ वर्मा)

कहानी: सज़ा लेखक: अमिताभ वर्मा स्वर: अमिताभ वर्मा

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