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सम्पादकीय

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ISSN 2292-9754

वर्ष: 16, अंक 179, अप्रैल द्वितीय अंक, 2021

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संपादकीय

समीक्षक और सम्पादक
सुमन कुमार घई

सम्पादन की परिभाषा क्या है? मैं किताब में दी गई परिभाषा की बात नहीं करता; वह क्या है हम सब जानते हैं। परन्तु मैं व्यवहारिक परिभाषा की बात करता हूँ। प्रायः सम्पादकों के साथ इस विषय पर जब बात होती है तो कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता या यूँ कहूँ कि उत्तर से मुझे संतोष नहीं मिलता। संतोष क्यों नहीं मिलता – अब मैं आत्मविवेचन में उलझ जाता हूँ; अंतर्मुख हो, जितना विचार करता हूँ उतने ही अपने लिए प्रश्न खड़े कर लेता हूँ। क्या रचना का मूल्यांकन करते समय मैं उतना निष्पक्ष हो पाता हूँ जितना कि सम्पादक होना चाहिए? क्या मैं रचना को पढ़ते हुए...

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net

विशेषांक

वर्ष 2020 कोरोना संकट के संदर्भ से बदलता जीवन

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विशेषांक सूची

डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

अपूर्ण साधना 
|

सुबह पंछियों की चहचहाहट से गुरुमाँ की नींद…

कहाँ गए वे मेरे गाँव
|

बचपन के अपने अभिन्न मित्र मंगल के बार-बार…

चूहे का पहाड़
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एक चूहा सारी ज़िंदगी पहाड़ खोदता रहा। जब उसका…

चढ़ावा
|

मंदिर में एक हज़ार एक रुपये चढ़ाने के बाद…

ज्ञान की बात
|

मित्र को उदास देख मैंने पूछा, "क्या…

डाकिया
|

माधुरी बड़ी अधीरता से डाकिए का इंतज़ार कर…

दो टूक बात
|

"आपने शादी के पहले ख़ुद मुझसे बहुत सारी…

पिंजरा
|

एक बड़ा ही शक्तिशाली राजा था। उसे शिकार खेलने…

बहू की भूमिका
|

लॉक डाउन की वजह से कहीं आने जाने की मनाही…

बिल्लो की भीष्म प्रतिज्ञा – 2
|

वह मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोले "बेटा…

मैडम एम
|

"चलिए मैडम उठिए पुस्तकालय बंद होने…

राग-विराग – 9
|

वापसी में रत्ना बहुत चुप-चुप थी। नन्ददास…

वजूद
|

सुधा के एम.ए. करते ही घर में ज़ोर-शोर से…

शक है उन्हें
|

 आज वह उदास थी। सुंदर गोल मटोल गुड़िया…

सहनशक्ति
|

व्यापार में घाटे के दौरान पिता की मृत्यु…

हास्य/व्यंग्य

खेला होबे
|

पूर्वी भारत से हमारे राम जय बाबू पधारे।…

चुनाव करवाइए, कोविड भगाइए
|

इस कोरोना ने साल भर से धुआँ दे रखा है। बीवी…

चुनाव का मधुरस्वभाव 
|

(जैनन प्रसाद फीजी के व्यंग्य लेखक हैं)  …

मिलावट का व्याकरण
|

मेरा मुहल्ला स्वाधीन देश का एक आज़ाद मुहल्ला…

आलेख

अथ विधुर कथा
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इस संसार में नारी और नर के बीच पति पत्नी…

परम्परा और आधुनिकता
|

परम्परा पर चर्चा करने से पहले हमें यह जानना…

पहाड़ के आँसू
|

इस बार पहाड़ फिर जी भरकर रोया है। पहाड़ को…

समीक्षा

इन्द्रधनुषी हाइकु की पहली आभा– ‘यादों के पंछी’
|

समीक्ष्य कृति: यादों के पंछी (हाइकु संग्रह) लेखक: डॉ. सुरंगमा…

दम तोड़ती मानवता के गाल पर तमाचा है: 'पुस्तक पैसा बोलता है’
|

समीक्षित पुस्तक: पैसा बोलता है रचनाकार: गंगा प्रसाद त्रिपाठी'मासूम'…

रंगमंचीय दृष्टिकोण और राधेश्याम कथावाचक के नाटक
|

पुस्तक: पंडित राधेश्याम कथावाचक: रंगायन  संपादक: हरिशंकर शर्मा प्रकाशक:…

संस्मरण

बचपन कितना भोला-भाला 
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दिनांक 15 नवम्बर 2020 सामने की घड़ी ने टन…

अन्य

साक्षात्कार

कविताएँ

अभिनन्दन है 
|

नये साल का   अभिनन्दन है  कितना…

अहिंसा का उपदेश 
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अहिंसा का उपदेश शेर और हिरण दोनों ही के…

आज ज़िन्दगी को फिर से ढूँढ़ते हैं
|

चलो हँसने की कोई वजह ढूँढ़ते हैं, जिधर ना…

आवारा बादल
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आवारा बादल हूँ मैं और तू है सावन की घटा;…

आज़ादी मुफ़्त नहीं मिलती 
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मनाओ जश्न दिल खोल के यारो  घड़ी ऐसी…

ईर्ष्या की खेती
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मिट्टी की मिठास को सोख ज़िद के ज़मीन पर उगी…

उदास नदी पर सात कविताएँ   
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(१) सूख कर काँटा हो गई नदी, पता नहीं, किस…

उम्मीद
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हथेलियों की  उलझी रेखाओं के जंगल से…

ऊख
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(१) प्रजा को प्रजातंत्र की मशीन में पेरने…

कबीर छंद – 001
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कबीर छंद इसके प्रत्येक चरण में 27 मात्राएँ…

काल डमरू
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काल का डमरू बालू की घड़ी सरकती रेत हमारी…

किसान है क्रोध
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निंदा की नज़र तेज़ है इच्छा के विरुद्ध भिनभिना…

कोना-कोना कोरोना-फ़्री
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चलें मिलकर एक ऐसा मंच बनाएँ यारो, जहाँ कुछ…

खुश है नदी –सात कविताएँ  
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   (1) आकाश में– उमड़ते–घुमड़ते…

खैनी भी मलनी है
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सड़कों का जिस्म ट्रैफ़िक से छलनी-छलनी है।…

गुरु पर दोहे
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गुरु अमृतमयी जगत में, बाक़ी सब विषबेल। सतगुरु…

घिरनी
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फोन पर शहर की काकी ने कहा है कल से कल में…

चौपट कर दी 
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चौपट कर दी अबकी होली, इस कोरोना ने भइया।…

जीवन का उद्देश्य
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जीवन का उद्देश्य वैसे तो कुछ भी नहीं प्रकृति…

टेसू की फाग
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  गंधवाही मन टेसू की फाग।   सुगंध…

थ्रेसर
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थ्रेसर में कटा मज़दूर का दायाँ हाथ देखकर…

नदिया का ख़त सागर के नाम
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नदिया का यह ख़त जो सागर तक पहुँचा नहीं,…

नफ़रतों के बीज ही बो दूँ
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अपनापन, मीठी सी बातें, जिनकी चुभन उनके,…

परोपकार का मूल्य
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इस दुनिया में कुछ लोगों ने दीन-दुखियों की…

पानी की क़िल्लत
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यहाँ पानी की क़िल्लत, यहाँ पानी की क़िल्लत,…

प्यार कब शान्ति बन गया!
|

प्यार कब शान्ति बन गया!प्यार कब शान्ति बन…

प्रभु प्रार्थना
|

सूचीमुखी छंद  विधान- [सगण  मगण]…

प्लम ब्लॉसम की बारिश
|

मूल कवि: युआन तियान अँग्रेज़ी अनुवाद: डेनिस…

बदबू की धौंस
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बदबू मद में चूर वो अपनी बदबू पर इतराता है…

बदलते इंसान
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जब सब समझाएँ तो समझ जाना चाहिए, जो छोड़…

बेरोज़गार की व्यथा!
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गर्मी बीती, वर्षा सूखी, अब आ धमकी सर्दी,…

भय
|

सारे दिमाग़ को ख़रच देता है यह भय। सारी नसें…

मन करता है फिर से
|

मन करता है फिर से उन जज़्बातों को जीने का…

मुहावरे वाली रचना
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दिनभर मधुमक्खियों की तरह व्यस्त रहती हूँ…

मैं क्यों बोलूँ ?
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जब घर जला है तेरा, जब राख हुआ धन तेरा, नुक़सान…

मैं चलता रहा
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मैं चलता रहा गिरता रहा, सिर्फ़ उसे पाने को,…

ये चिंताएँ, ये दुविधाएँ
|

ये चिंताएँ, ये दुविधाएँ क्षण भर में ही मिट…

ये मेरा देश!
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ये मेरा देश, है सुंदर वेष, ये धरती अति विशेष,…

ये रंग ज़िंदगी के हैं
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कुछ रंग लाचार कर गए, सिसक सिसक के चुप हुए;…

विज्ञानकु: कोरोना 
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खेल नहीं है विषाणु है कोरोना धैर्य न खोना।…

विराम
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दैहिक और मानसिक आनंद तो, हमें कभी-कभी कान…

वक़्त के दरिया में
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(आंचलिक नवगीत)    वक़्त के दरिया…

सपाट बयान
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तंत्र! विश्व की परिधि पर घूमता एक ऐसा दोगला…

समझती ख़ूब है लेकिन!
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ये जो नरमी तेरे होंठो पे ठहरी है, तेरी बाँहे…

स्त्री है तो जीवन है
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सहनशीलता की प्रतिमूर्ति,  त्याग क्षमा…

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा
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नए वर्ष में सजे हुए है, हर द्वारे पर वंदनवार।…

हर बार की तरह
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हर बार की तरह इस बार भी सब शब्द-मनीषी करेंगे…

क़िले वाला शहर
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खंडहर ही खंडहर औ क़िले वाला शहर है। बल खाई…

ज़िंदगी
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ज़िंदगी एक रास्ता है जिस पर सबको जाना है…

शायरी

कायनात साज़िश क्यूँ करती है?
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ऐ अल्लाह! मोहब्बत के हर फसाने को नाकाम करने…

मैं शायर हूँ दिल का जलाया हुआ
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ग़ज़ल- 122 122 122 12 अरकान- फ़ऊलुन फ़ऊलुन…

क़रार
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बिखर रहा है कोई तो देख लो ठीक से, यही तो…

साहित्य के रंग शैलजा के संग

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात SAHITYA KE RANG-SHAILJA KE SANG

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