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ISSN 2292-9754

वर्ष: 16, अंक 173, जनवरी द्वितीय अंक, 2021

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संपादकीय

सम्पादक, लेखक और ’जीनियस’ फ़िल्म
सुमन कुमार घई

प्रिय मित्रो समय-समय पर अपने सम्पादकीय इत्यादि में मैं सम्पादन के महत्व के बारे में उल्लेख करता रहता हूँ। जब मैं सम्पादन के महत्व की बात करता हूँ तो यह केवल पत्रिका या समाचार पत्र तक सीमित नहीं है बल्कि मैं कहानी या कविता संकलनों और उपन्यासों इत्यादि को भी उसमें गिनता हूँ। भारत के साहित्य जगत को यह प्रक्रिया कितनी स्वीकृत है या नहीं है इसका मुझे कोई व्यक्तिगत अनुभव नहीं है। अभी तक मैंने कभी किसी लेखक से नहीं सुना कि किसी प्रकाशक ने उसके लिए कोई सम्पादक नियुक्त किया है। प्रकाशक के लिए सम्पादन लेखक का दायित्व है और लेखक सम्पादन को केवल प्रकाशन के...

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net

विशेषांक

फीजी का हिन्दी साहित्य

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विशेषांक सूची

डॉ. शैलजा सक्सेना (विशेषांक संपादक)

जीवटता और सहज आस्था की मशाल: फीजी साहित्य   फीजी के हिन्दी साहित्य पर विशेषांक का विचार सहसा मन में उदित हुआ और सोचने पर बल पकड़ता गया, खोजने पर समंदर बन गया और डूबने पर अनेक मोती लेकर अब आप के सामने उपस्थित है। विश्व के मानचित्र पर कुछ बिन्दुओं के रूप में दिखने वाले इस देश में हिन्दी साहित्य का.. आगे पढ़ें

(विशेषांक सह-संपादक)

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

विडियोज़

कहानियाँ

अनामिका
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वो दिन भी कुछ अज़ीब ही था जब अनामिका अनाथ…

ऐसा क्यों
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सुबह के साढ़े सात बजे हैं। यह समय रेलकर्मियों…

जहरा
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मैं ठीक से नहीं बता पाऊँगा कि उसका नाम जहरा…

दरअसल
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वह दोशीज़ा सरेआम मुझसे इस क़दर लिपटी खड़ी थी…

मंथरा
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इस बार हम पति-पत्नी मेरी स्टेप-मॉम की मृत्यु…

मैं ऑटो वाला और चेतेश्वरानंद – 4
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घर लौटे तो देर हो चुकी थी। हम सब बहुत थकान…

राग-विराग – 3
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जिस राह को उतावली में पार कर तुलसी रत्नावली…

लुगाइयाँ
|

मूल : किरीट दूधात अनुवाद : . रानू मुखर्जी…

शिक्षा का मर्म
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दिसम्बर की ठंड, सूर्यास्त और गंगा तट पर…

संतोष धन सुख की खान
|

“मणि! तुमने आत्महत्या का इतना बड़ा…

संवेदना
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दो साल भी नहीं हुए थे शादी के, किरण विधवा…

हास्य/व्यंग्य

अंधेर नगरी फ़ास्ट क़ानून
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बीसियों बार अंधेर नगरी की कच्ची सड़क पक्की…

तो छोड़ दूँगा
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"काठ का घोड़ा, लगाम रेत की, नदी पार…

आलेख

समीक्षा

कहानी संग्रह खिड़कियों से झाँकती आँखें
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पुस्तक: खिड़कियों से झाँकती आँखें (कहानी संग्रह)      लेखक:…

ठुमरी की ठनक और ठसक का दस्तावेज़
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भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में अध्येता के रूप में दो वर्षों तक जिस…

मरा हूँ हजार मरण, पाई तब चरण-शरण – अभी न होगा मेरा अन्त
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पुस्तक शीर्षक: अभी न होगा मेरा अंत : निराला  लेखिका: डॉ. उषारानी…

कविताएँ

अंतराल
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अंतराल चाहे जितना छोटा हो अंतराल  चाहे…

आसमान की चादर पे
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आसमान की चादर पे थिगड़े लगे हुए।  …

इस जाड़े को 
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इस जाड़े को दूर भगाओ  सूरज भैया जल्दी…

कटी पतंग
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माँझे से बँधी हूँ,  चकरी से जुड़ी हूँ, …

कुछ छूट रहा है
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किताबों के पन्ने पर जब आँखें हँसने लगे तब…

चौबीस घंटे में
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मैं जी लेता हूँ ख़ूब, सब दु:ख-दर्द भूल जाता…

दादी का संदूक!
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स्याही-क़लम-दवात से, सजने थे जो हाथ! कूड़ा-करकट…

पत्थर में विश्वास
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पत्थर में विश्वास एक सुरक्षित विश्वास है…

प्यार का एहसास
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आँखों में चाहत हो तेरे,  दिल धड़के…

प्रतीक्षा हिन्दी नववर्ष की
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शुभकामनाएँ ख़ूब बाँटते अहा आंग्ल नववर्ष की…

भूल गई दुनिया अब तो
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भूल गई दुनिया अब तो चिट्ठी-पत्री-तार है।…

मन बातें
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काजल लिखना कँगना लिखना लिखना मन की बातें।…

मुझको हिंदुस्तान दिखता है 
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ना दिल्ली कभी, ना राजस्थान दिखता है, मैं…

मुट्ठी भर धूप
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दोपहर ढल भी न पाई थी  और बदली साँझ…

मैंने पत्र लिखा था
|

मैंने पत्र लिखा था तुम्हें मिला या नहीं…

लोगों में क्यों मक्कारी है
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लोगों में क्यों मक्कारी है कैसी ये दुनियादारी…

वो भी तो कश्मीर ही था 
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इन अटल हिम-चट्टानों से  जब नहीं बरसते…

शब्द
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खेल है शब्दों का ही सारा चाहे मन में विष…

शुभ्र चाँदनी सी लगती हो
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शुभ्र चाँदनी सी लगती हो, किस के लिए सँवरती…

हर कोई जीता है
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जीने के सिवा ज़िदगी का कोई उद्देश्य नहीं…

शायरी

लेकर निगाह-ए-नाज़ के ख़ंजर नए-नए
|

ग़ज़ल- 221 2121 1221 212 अरकान- मफ़ऊल फ़ाइलात…

साहित्य के रंग शैलजा के संग

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात SAHITYA KE RANG-SHAILJA KE SANG

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