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कहानी

बदलती सरगम

(मूल राजस्‍थानी क‍हानी का स्वयं द्वारा हिन्‍दी अनुवाद)   मन की जिस अनबन और आकुलता को…

रेत का घरौंदा 

  दिव्या अभी-अभी रूम में पहुँची ही थी कि उसकी प्रिंसिपल संजू मैम का फोन आया। उन्होंने कहा, “दिव्या…

ई-सुलह

  कल सुबह मैं स्कूल-ट्रिप पर पैरिस जा रही हूँ; मुझे चिंता है कि मेरी अनुपस्थिति में पापा-मम्मी…

लड़ाके

  “अक्षत बीच मत्थे पर लगाइव,” ठकुराइन चिल्लाईं। छोटी बहू काँप उठी। उसने सिन्दूर, तेल,…

आदिम राग

  अचानक चीं ईं . . . ईं करके किसी छोटे स्टेशन पर ट्रेन रुक गई थी। यूँ छोटे स्टेशनों पर इस ट्रेन…

बाबुल की देहरी

  घर में प्रवेश करते ही नज़र अलमारी पर जा रुकी—शर्बत सेट, किताबें, कैसेट्स और न जाने क्या-क्या…

अपने-अपने घोंसले-अपना-अपना आसमान

  “बाबूजीऽऽऽऽऽ . . .”  उसकी आवाज़ में तल्ख़ी थी। वह चीखकर बोला था। बोलते समय उसके…

बर्फ़ के अंगारे

  ख़ून को जला देने वाली जून की तपती दुपहरी। लोगों के शरीर से पसीना चूह रहा था। दिल्ली रेलवे स्टेशन…

धत्त तेरे की . . .

  जैसै–जैसे दिन चढ़ता जा रहा था, चौधरी दीनबंधु की ऊबन बढ़ती जा रही थी। वे कभी बाहर निकलकर टोह…

रूपान्तरण–कीड़े से तितली

  “मैम, क्या करूँ? मेरा बच्चा छह महीने का है, कमज़ोर है, अब तक न बोतल से दूध पीना सीखा है…

देशद्रोह का कलंक

  प्रोन्नति की ख़ुशी में मैं और मेरा परिवार मगन ही था तभी विभाग द्वारा स्थानान्तरण की सूची जारी…

टकसाल 

    इस आवाज़ के कई तरह से मायने लगाए जा सकते थे। मानों कोई अँधेरी, गहरी खाई से आवाज़ दे रहा…

रोशनी की वह लहर

  हर साल की तरह इस साल भी 19 मई को रोशनी की बेटी कलि ने अपनी माँ को नैनीताल की फ़्लाइट टिकट ईमेल…

बोर्डिंग पास

  गायत्री का मन तो जैसे बल्लियों उछल रहा था। यह सोच-सोचकर फूली नहीं समा रही थी कि “एक ही…

अन्तराल

  सुजाता और मनोज में आज दो-तीन दिनों से झिकझिक हो रही है। ये दोनों अपने शहर से बहुत दूर हैदराबाद…

अटल निश्चय

  जीवन भर जिन बच्चों के लिए नमिता संघर्ष करती रही, उन बच्चों के व्यवहार से इतनी उपेक्षा मिली कि…

तोते वाला कबाड़ी

  लंबी धूसर दाढ़ी, मेंहदी से रँगे लाल बाल, चौड़ी पेशानी पर उतरती कुछ घुँघराली लटें, बड़ी-बड़ी आँखें…

कस्तूरा

  किसी भी देश के सरहदी इलाक़ों का वातावरण उसके बाक़ी इलाक़ों से एकदम अलग होता है। सीमा दर्शाने वाले…

डिजिटल अरेस्ट

  प्रातः सैर से वापस आने के बाद पापा ने चाय पीते हुए डाइनिंग टेबल पर पड़े, आज के अख़बार को बेटी मालविका…

पीपल, पुरखे और पुरानी हवेली 

  चैटर्जी लेन का यह सबसे पुराना, दो तल्ला मकान होगा जिसे समय के साथ नया नहीं कराया गया। नीचे-ऊपर…

बरामदे पर चाय

  इतने वर्षों बाद आज उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। इसी समय की तो प्रतीक्षा थी उन्हें कि वे अपने…

हमारा मुल्क

  आज बाज़ार से घर जाने के लिए रिक्शे में बैठी तो अनजाने नंबर से एक फोन आया। न चाहते हुए भी उठा…

सुकून

  सुबह की चाय पीते हुए मीठी आवाज़ में संध्या ने बेटे से पूछा, “ऑफ़िस कितने बजे जाना है?” …

एक थी कल्ली

  तूने आज फिर मुझे रुला दिया कल्ली। अपनी पच्चीस बरस की नौकरी में तेरी जैसी न जाने कितनी छोरियाँ…

संकल्प 

   “मम्मी, पापा और भैया छुट्टी के दिन भी सुबह-सुबह तैयार होकर कहाँ गये हैं?” नेहा…

बूढ़ी आँखों का दर्द

    पूजा की छुट्टियों में घर लौटा हूँ और आज वह अपने सवालों के लिए चली आ रही है। मैंने उसे…

सुरसतिया

  सुबह का सूरज बाँस भर चढ़ आया था। शरद की गुनगुनी धूप थी। पूस मास चल रहा था। सप्ताह भर से ठंड का…

पुनर्जन्म 

जन्मोत्सव  दीवार पर टँगी ढोलकी को उतार उसकी रस्सियाँ कसने में निमग्न चंपा बहुत हड़बड़ाहट में थी।…

ख़रीदा हुआ जीवन

  आधुनिक संचार व्यवस्था के समय में हस्तलिखित पत्र तो पुरातत्त्व विभाग में सुरक्षित रखे जा रहे,…

कंक्रीट की फ़सल

प्रकाशन वर्ष 2012, (हरिगंधा, पंचकूला)   ‘छोटी-सी सरकारी नौकरी में क्या होता है? दो बच्चों…

आरक्षण

मेघना शंकर के घर आज बहुत चहल-पहल थी। आज ही आईआईटी-जेईई के नतीजे आए थे। मेघना शंकर ने पूरे भारत में शीर्ष…

भड़ास

अपने देश की सेवा में अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले जाँबाज़ जगरूप सहगल को बचपन से ही जासूसी कहानियाँ…

सूखे पत्ते

एक लम्बे अरसे के बाद विदेश से रघुबीर अपने शहर वापिस लौटा। बहुत उत्सुक था अपनी भूली-बिसरी यादों को फिर…

उसने सच कहा था

“ड्यूमारिए लाईट देना,” स्वर में अपरिपक्वता का आभास होते ही मैंने सर उठाया तो सामने मेकअप…

स्वीकृति

सात दिन बहुत ज़्यादा थे . . . शायद नहीं, बहुत कम। लिखने के लिए क्या था उसके पास? अभी कल ही सम्पादक का…

दो बिस्तर अस्पताल में

’बिना किसी सरनामें यानी भूमिका के मैं अपनी बात आप जैसे समझदारों के सामने रखना चाहती हूँ। आजकल…

एक और विदाई

विमला आठ भाई बहनों में सबसे छोटी थी। माता पिता के पास धन का अभाव होने के कारण चाहते हुए भी विमला को…

वसंत रुत

वह औरत भी उसी अपार्टमेंट का हिस्सा है। कभी-कभार दोपहर के बाद यहाँ गोल घेरे के चक्कर लगाती, बेंच पर बैठ…

एक खेल अटकलों का

वह रोज़ सुबह काम पर जाती थी। कभी आठ बजे तो कभी आठ बजकर पाँच मिनट पर। शाम चार से सवा चार बजे के बीच बिल्डिंग…

अक्स

सब लोग मुझे ‘स्पॉइल्ड चाइल्ड’ कहते हैं पर मेरा दावा है कि मैं नहीं, मेरी नानी ‘स्पॉइल्ड…

विशाखा

अभी भी हाथ से कुछ नहीं फिसला! ज्यों का त्यों सब धरा है तेरी हथेली पे।  "ज़िद से नहीं बिटिया…

बेटे का सुख

दो बेटियों के बाद जब दिवाकर के यहाँ बेटा पैदा हुआ तो उसकी ख़ुशियों का अन्दाज़ा लगाना बहुत मुश्किल था।…

पगड़ी 

रचना समीक्षा: पगड़ी का दार्शनिक चिंतन – डॉ. पद्मावती रचना समीक्षा: धीमे स्वर में गहराई से…

मन्तर

"अरे, बकरिया कहाँ गइल रे?" सरस्वती ने आवाज़ दी। सूरज ढलने लगा था। सभी पशु-पक्षी अपने बसेरों…

साझेक खेती 

हँसुआ चलाए के मौसम फिर से आए गए। जिधर देखो उधर सब खेत में हरियर और पीयर रंग देखाए लगा। कड़ा घाम और हवा…

अंतर्द्वंद्व 

परिचय करवाया किस्कू जी ने, "दुमका में हिंदी अफसर हैं मैडम शालू।"  उसमें से कुछ लोग पढ़े-लिखे…

सुरंग 

मैं जानता हूँ, मुझे बराबर उलाहना-परतरा लोग देते रहे हैं, गोया कि आदमी न होकर अन्य जीव हूँ। फिर भी मैं…

ऋण – ऊऋण

कुछ वर्ष पहले बीती हुई यह बात सोचने पर ऐसी लगती है ऋण मानों बस कल ही घटित हुई हो, यूनेस्को की टीम का…

प्रवचन

शहर में चारों ओर स्वामी स्वरूपानंद के पोस्टर लगे थे। सभी प्रमुख सड़क, रास्ते और स्थान स्वामी स्वरूपानंद…

सेमिनार

पन्द्रह दिनों की जी तोड़ मेहनत भागदौड़ और उससे पहले की भी ख़ूब सारी मीटिंग्स मेल मुलाक़ात। पूरे विभाग…

स्पोर्टस ट्रायल

“मैडम आ….प किस कॉलेज में हो?” पसीने से लथपथ उस लड़की ने हिन्दी के देहाती अंदाज़ में…

कोढ़िन

पार्वती अम्मा के न आने पर उनके लिए पूरा दिन गुज़ारना बहुत कठिन हो उठता था। पैंसठ साल की पार्वती अम्मा,…

आवरण

इस तरफ़ से जहाँ वह बैठे थे, वहाँ से उस तरफ़ का दृश्य साफ़ ही दिखाई देता, पर दोनों छोरों के बीच कोहरे का…

पफ़

आज इतवार है। सप्ताह भर की दौड़-भाग को विश्राम। सभी काम सुस्त गति से निपटाये जा रहे हैं। ग्रुप हाउसिंग…

दुर्गी

उसके  हाथ-पैर काँप रहे थे। हाथ-पैर ही नहीं, पूरा शरीर काँप रहा था...। स्वर तीव्र होते-होते गले…

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