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श्रीराम भारत माता की मिट्टी के लाल थे 

 

श्रीराम भारत माता की मिट्टी के लाल थे, 
‘माता भूमि पुत्रोऽहम पृथिव्या’ ख़्याल के 
राम नहीं थे गोरे, वे वर्ण से श्यामलाल थे! 
 
भारतीय क्षेत्ररक्षी क्षत्रिय योद्धा भूपाल थे, 
जननी जन्म भूमि रक्षक मातृ-पितृ भक्त, 
वे विदेशी आक्रांता रावण के महाकाल थे! 
 
रावण वेदपाठी पंडित पर पापी चोर तस्कर 
घुसपैठिए बलात्कारी क्रूर कपटी कमाल के, 
चरित्रहीन त्रिपुण्डधारी पाखण्डी कूटचाल के! 
 
सीताहरण के पूर्व रावण ने अग्रज कुबेर के 
पुत्र नल कूबर की साध्वी पत्नी को हरा था, 
पुत्रवधू सम बाला से बलात्कार भी करा था, 
नपुंसकता का शाप झेलने वाले वे व्याल थे! 
 
सीता हरण के पूर्व शापित रावण ने कौशल्या; 
राम की जननी; दशरथ भार्या अपहरित किया, 
राम ने रावण को घर में घुसके संहारित किया! 
 
मगर सोने की लंका त्यागकर अयोध्या आ गए, 
‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी’ कहके 
राम इस धरा पर चरित्र निर्माण के मिसाल थे! 
 
राम इस्तेमाल किए गए छल छंद से हर काल में, 
कभी राम का चरित्र हनन हुआ, कभी मर्यादित वे, 
मगर विश्व भर में वरेण्य रहे हैं राम हर हाल में! 
 
आदि रामकथा लिखी भंगी ऋषि कवि वाल्मीकि ने, 
राम को राम बनाने वाले दलित अंत्यज वनवासी थे, 
रामकथा प्रसिद्ध हुई जैन सिख मत मतावलंबी में! 
 
राम नहीं सिर्फ़ रामबोला दूबे के मानस कथावाचकों के, 
राम हैं राम नाम की उपाधि धारण करने वाले हरिजन, 
सुपच किरात कोल कलवार व वर्णाधम तेली कुम्हार के, 
राम नहीं तुलसी के, राम हैं नानक कबीर रैदास के भी! 
 
राम नहीं थे कोई रावण जैसा ब्राह्मण पंडित महाज्ञानी, 
राम के संगी थे बंदर भालू केवट भील असभ्य अज्ञानी, 
रामलला का प्राण प्रतिष्ठा करे कोई लघु अंत्यज प्राणी, 
राममंदिर का उद्घाटन करे हिन्दू जैन बौद्ध सिख पंथी! 
 
राम कोई शिवलिंग नहीं, जिनके लिए वेद मंत्रोच्चार हो, 
राम का अनुयाई वही जो सिर्फ़ जय श्रीराम उच्चार सके, 
राम कोई बाममार्गी त्रिपुण्डधारी नहीं, एक गृहस्थ सपूत थे, 
राम नाम कोई पाखण्ड नहीं ‘सर्वधर्मसमभाव’ संयुक्त हो! 
 
राम लला का दर्शन हेतु सभी जीव जंतु को निमंत्रण दो, 
हर धर्म मज़हब की माँ श्रद्धा हौआ मेरी शबरी बुलाओ, 
नारी स्पर्श से रामलला जीवंत हो, सीता को सम्मान दो, 
गुह निषाद लक्ष्मण शत्रुघ्न हनुमान का भरतमिलाप हो! 

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