पिक्चर परिवर्तन पार्टी
हास्य-व्यंग्य | हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी वीरेन्द्र बहादुर सिंह15 May 2026 (अंक: 297, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
फ़िल्म के सेट पर दो-चार एक्स्ट्रा कलाकार हीरो के पास दौड़ते हुए आए और उसे कंधों पर उठा कर चिल्लाने लगे, “हमारा नेता कैसा हो, फ़िल्म के हीरो जैसा हो।”
हीरो ने पहले तो गद्गद् होने की एक्टिंग की, लेकिन फिर ट्यूबलाइट जलने पर बोला, “अरे बेवुक़ूफ़ो, मनोरंजन करने की ज़िम्मेदारी तो वैसे भी ज़्यादातर नेताओं ने उठा ही ली है। अब अगर वे लोग हीरो जैसे दिखने भी लगेंगे तो हमें तो उनकी सभाओं में कुर्सियाँ लगाने की नौबत आ जाएगी।”
एक एक्स्ट्रा कलाकार बोला, “सारी बास, हमारी डायलाग डिलिवरी में थोड़ी गड़बड़ हो गई। वहाँ तमिलनाडु में एक हीरो मुख्यमंत्री बन गया, तो हम चाहते हैं कि आप भी मुख्यमंत्री बनें।”
हीरो चेहरे की ख़ुशी छिपाने की कमज़ोर एक्टिंग करते हुए बोला, “जाने दो, साउथ में तो कलाकारों के सिंहासन पर बैठने की परंपरा पड़ गई है। हमारी इंडस्ट्री के ऐसे भाग्य कहाँ?”
दूसरा एक्स्ट्रा बोला, “अरे सर, क्यों नहीं? अब हम ऑस्कर लेवल की फ़िल्में बनाने लगे हैं तो साउथ लेवल की राजनीति क्यों नहीं कर सकते?”
तीसरा एक्स्ट्रा बोला, “सर, आप चुनाव लड़ो तो तमाम नागरिकों को हर फ़िल्म के प्रीमियर की दो टिकट फ़्री देने का वादा करना। वैसे भी हमारी फ़िल्मों के प्रीमियर ऐसे ही मुफ़्तख़ोरों से हाउसफ़ुल होते हैं। ये सारे मुफ़्तख़ोर फ़िल्म देखने के साथ वोट भी देंगे।”
चौथा एक्स्ट्रा बोला, “हर फ़िल्म नहीं सर, सिर्फ़ आपकी एक्शन फ़िल्म। आपको पर्दे पर एक्शन करते-करते देखकर जनता को भरोसा हो जाएगा कि यह मुख्यमंत्री सच में एक्शन लेने वाला है। फ़िल्म का नाम रखेंगे, ‘वीर बैलेटवाला’ . . . अरे नहीं-नहीं, सारी, अब तो ‘वीर ईवीएमवाला’।”
“कट . . . कट,” पाँचवें एक्स्ट्रा ने चिल्लाकर कहा।
“‘वीर ईवीएमवाला’ जैसा टाइटल रखेंगे तो जनता समझेगी कि सर तो ईवीएम में घालमेल करके जीतने वाले हैं। उसके बजाय ‘वीर माइकवाला’ या ‘भाषणवीर’ ठीक रहेगा।”
छठा एक्स्ट्रा बोला, “मैंने तो पार्टी का नाम भी सोच लिया है, ‘पिक्चर परिवर्तन पार्टी’। प्रचार में जनता से कहेंगे कि हमें वोट दोगे तो हम परिवर्तन की पिक्चर दिखाएँगे।”
हीरो उर्फ़ भावी मुख्यमंत्री थोड़ा शर्माते हुए बोला, “लेकिन मुझे तो ठीक से कार चलानी भी नहीं आती। फिर मैं सरकार कैसे चलाऊँगा?”
एक एक्स्ट्रा बोला, “अरे सर, इतना टेंशन मत लो। किसी फ़िल्म में मुख्यमंत्री का रोल मिला है ऐसा समझकर बस एक्टिंग करनी है। देखिए, आजकल सचमुच कितने ही मुख्यमंत्री और मंत्री कुर्सी पर बैठने के बाद सिर्फ़ मुख्यमंत्री या मंत्री होने की एक्टिंग ही करते हैं, असली काम तो करते ही नहीं।”
इस बार हीरो हँसने की एक्टिंग करने के बजाय सचमुच हँस पड़ा।
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