आनंदो . . . आनंदो, एल नीनो आ रहा है
हास्य-व्यंग्य | हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी वीरेन्द्र बहादुर सिंह15 May 2026 (अंक: 297, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
सरकारी दफ़्तर में एक अधिकारी लड्डू का डिब्बा लेकर सभी को बाँटने निकले। लड्डू देते हुए वह कह रहे थे, “आ रहा है . . . आ रहा है . . . आनंदो . . . आनंदो . . . लो, मुँह मीठा करो।”
दूसरे अधिकारी ने तुरंत चार लड्डू झपट कर कहा, “पिछले दस-बारह साल से सरकार में एक सुख तो हो गया है कि चारों तरफ़ से आनंद, उत्सव, हर्ष और जय-जयकार के ही समाचार आते हैं। बोलो, ऐसे ही कोई ख़ुशी के समाचार हैं न . . . इसी बहाने लड्डू वाले भी कमा गए।”
पहले अधिकारी ने कहा, “डियर, लड्डू वाला तो झाँकी है, अभी हम सबकी बारी है। सबको कमाना है। बॉस, आपने सुना ही होगा कि वह एल नीनो इस बार आ रहा है। वह भी कोई मामूली नहीं, सुपर एल नीनो . . .”
तीसरे अधिकारी ने लड्डू मुँह तक ले जाकर बोला, “क्या? एल नीनो? वह तो कहते हैं न कि नुक़्सानदायक होता है? बारिश कम होगी और बहुत परेशानी होगी?”
लड्डू वाले अधिकारी ने उनके मुँह में लड्डू ठूँसते हुए कहा, “अरे यार, अब व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के ज़माने में तुम ये सारी देसी भूगोल की छोटी-छोटी बातें भूल जाओ। अब तो नागरिक शास्त्र का एक अनलिखा नियम है कि देश-दुनिया में कुछ भी हो, परेशानी तो सिर्फ़ आम जनता को ही होगी। हमें, यानी तंत्र के लोगों को, तो आपदा में भी अवसर मिल जाएगा। सूखा पड़ेगा तो राहत कार्यों और चारे के वितरण की फ़ाइलें शुरू होगी। दशकों पहले हमारे पूर्वजों को सूखे में चाँदी हो जाती थी, अब तो हम सोना बनाएँगे, सोना।”
चौथे अधिकारी ने सुर मिलाते हुए कहा, “ख़ुशी की बात तो यह भी है कि आने वाले कुछ सालों तक हमें एल नीनो के रूप में नया विलेन मिल जाएगा। हम मंत्रियों के भाषणों में लिखकर देंगे कि महँगाई बढ़ने के लिए, किसानों की आत्महत्या के लिए, शहरों और गाँवों में पानी की कमी के लिए, ऐसी कितनी ही समस्याओं के लिए एल नीनो को ही आरोपी नंबर एक घोषित कर दो।
“हमारा कोई नाम नहीं लेगा। हमारे तंत्र पर कोई दोष नहीं डालेगा। हमारे मंत्रियों की नीयत और क्षमता पर कोई सवाल नहीं उठाएगा। अब कुछ सालों तक बस एल नीनो . . . एल नीनो का ही जाप करेंगे।”
इतने में एक सीनियर अधिकारी आकर बोले, “अरे, छोड़ो ये सब बातें। लड्डू हों या कुछ और खाने के लिए बहाने ढूँढ़ने में समय मत बर्बाद करो। बाक़ी, कितनी भी समस्याएँ आएँ, हमें कोई विलेन ढूँढ़ने की ज़रूरत ही नहीं है। बेचारी जनता किसी भी समस्या के लिए किसी को ज़िम्मेदार ठहराती ही कहाँ है? देख रहे हो न, एक के बाद एक चुनाव के नतीजे।”
यह सुनकर बाक़ी सभी अधिकारी खिलखिलाकर हँस पड़े और एक-दूसरे को ताली देने लगे।
लड्डू वाला अधिकारी डिब्बा ख़ाली करके वहाँ से चलता बना।
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