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गंभीर लोगों के जीवन का मंत्र—हँसना मना है

 

जो व्यक्ति रोज़ कुछ नया नहीं सोचता, उसे युवा कभी नहीं कहा जा सकता। इसलिए रोज़ कुछ नया सोचते रहना चाहिए। 

बेंजामिन फ़्रैंकलिन का नाम तो सभी ने सुना है। 18वीं सदी की अमेरिकी दुनिया में उनका बड़ा प्रभाव था। वह एक महान वैज्ञानिक, लेखक, चिंतक और प्रकाशक थे। वह अपने विचारों से लोगों को प्रेरित करते थे। कुछ दिन पहले उनका एक कथन पढ़ने को मिला, जिसने भीतर तक प्रभावित कर दिया। उसका अर्थ कुछ ऐसा था कि ‘बहुत से लोग पच्चीस वर्ष की उम्र में ही मर जाते हैं, लेकिन उन्हें दफ़न पचहत्तर वर्ष की उम्र में किया जाता है।’

ऊपर से देखने में यह बात मज़ाक़ जैसी लग सकती है, लेकिन जीवन में उत्साह और उमंग खो चुके लोगों के लिए यह बहुत गहरी बात है। कुछ लोग बिना किसी कारण हमेशा गंभीर बने रहते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि वह पूरी दुनिया का भार अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। हास्य नाम की चीज़ उनके जीवन में होती ही नहीं। उनके जीवन में कोई उत्साह नहीं होता, कोई रंग नहीं होता।

ऐसे लोग जहाँ भी जाते हैं, वहाँ वातावरण बोझिल बना देते हैं। जीवन को लेकर उनकी सोच इतनी कठोर हो जाती है कि वे स्वयं भी आनंद नहीं ले पाते और दूसरों को भी आनंद लेने नहीं देते। जीवन केवल गंभीरता का विषय नहीं है, बल्कि जीने की एक कला है।

कुछ लोग तो दुनिया को यह जताने में लगे रहते हैं कि उनके पास हँसने का कोई कारण ही नहीं है। कोई अपने पद का उपयोग करता है, कोई अपने धन का। कुछ लोग अपने स्वभाव के कारण ही ऐसे हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि हर समय गंभीर बने रहना ही समझदारी है। जबकि सच्चाई यह है कि अत्यधिक गंभीरता व्यक्ति को भीतर से खोखला बना देती है।

जीवन एक उत्सव है। जिसके जीवन में उत्साह और उमंग नहीं है, वह जीवन का आनंद कैसे समझ सकता है? जो व्यक्ति हर समय नकारात्मकता और निराशा में डूबा रहता है, वह स्वयं को भी दुखी करता है और आसपास के लोगों को भी।

बेंजामिन फ़्रैंकलिन की बात केवल उम्र की नहीं थी, बल्कि मानसिकता की थी। कई लोग उम्र से जवान होते हैं, लेकिन सोच से बूढ़े हो चुके होते हैं। दूसरी तरफ़ कुछ लोग उम्रदराज़ होने के बावजूद मन से युवा बने रहते हैं।

ईश्वर ने मनुष्य को जीवन एक अनमोल उपहार के रूप में दिया है। इस उपहार का उपयोग कैसे करना है, यह मनुष्य के हाथ में है। जीवन जीना जितना सरल दिखाई देता है, वास्तव में उतना सरल नहीं है। हर व्यक्ति के अपने संघर्ष हैं, लेकिन उन संघर्षों के बीच भी जीवन को हल्केपन और आनंद के साथ जीना ही असली कला है।

यदि कोई व्यक्ति हमेशा नकारात्मक सोचता रहेगा, तो उसकी पूरी दुनिया नकारात्मक बन जाएगी। सकारात्मक सोच का परिणाम तुरंत नहीं मिलता, लेकिन धीरे-धीरे वही सोच जीवन बदल देती है। इसलिए यह ज़रूरी है कि मनुष्य जीवन के प्रश्नों का सामना सही मानसिकता के साथ करे।

आज के समय में लोग मानसिक शान्ति खोज रहे हैं। वे सफलता तो चाहते हैं, लेकिन मन की प्रसन्नता खो चुके हैं। उदासी और नकारात्मकता इंसान को भीतर से ख़त्म कर देती है। जीवन में अनिश्चितता के अलावा कुछ भी स्थायी नहीं है। इसलिए हर दिन को जीना सीखना चाहिए।

यदि हमेशा युवा बने रहना है, तो कुछ बातों को अपनाना ज़रूरी है, हमेशा सकारात्मक सोच रखें।

मन को अच्छे कार्यों में लगाएँ।

शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम करें।

सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करें। नकारात्मक विचार रखने वाले लोगों से दूरी बनाए रखें। अपने प्रिय लोगों के साथ समय बिताएँ। रोज़ कुछ नया सीखें और नया सोचें। जीवन में कोई न कोई शौक़ ज़रूर रखें। मित्रों के साथ समय बिताएँ।

हँसते रहिए। यदि ऐसा करेंगे तो पचहत्तर वर्ष की उम्र में भी पच्चीस वर्ष जैसे लगेगा। आपकी युवावस्था हमेशा बनी रहे, ऐसी शुभकामनाएँ। 

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